पेट्रोल पंप की कार्ड स्वैप मशीन से साइबर ठगी की रकम का खेल! दो प्रतिशत कमीशन पर बदलते थे ठगी के पैसे, तीन पर मुकदमा

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रुद्रपुर में साइबर अपराधियों का नया हथकंडा उजागर, एटीएम कार्ड स्वैप कर पेट्रोल पंप के खाते में पहुंचाते थे रकम; कर्मचारी नकदी निकालकर करता था सुपुर्द

राजू अनेजा, काशीपुर/ रुद्रपुर।साइबर अपराधी ठगी की रकम हड़पने के लिए अब ऐसे रास्ते तलाश रहे हैं, जिनकी कल्पना करना भी आसान नहीं है। ऑनलाइन ठगी से हासिल रकम को बैंक खातों से निकालने के लिए रुद्रपुर में पेट्रोल पंप की पीओएस (POS) मशीन का इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। यहां पेट्रोल भरवाने के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीन को ही कथित तौर पर साइबर ठगी की रकम नकदी में बदलने का जरिया बना दिया गया। पूरा खेल कमीशन पर चल रहा था। एटीएम कार्ड स्वैप कर पेट्रोल पंप के खाते में रकम पहुंचाई जाती और कर्मचारी दो प्रतिशत कमीशन काटकर बाकी नकदी संबंधित व्यक्ति को सौंप देता था।

पुलिस जांच में इस नेटवर्क की तीन अहम कड़ियां सामने आई हैं। मामले में पेट्रोल पंप के सेल्समैन, एटीएम कार्ड जुटाने वाले व्यक्ति और बैंक खाता उपलब्ध कराने वाले खाताधारक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

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नौ ट्रांजेक्शन ने खोली साइबर ठगी के नेटवर्क की पोल

गृह मंत्रालय की नोडल एजेंसी से मिले साइबर क्राइम अलर्ट के बाद साइबर सेल ने संदिग्ध बैंक खाते की पड़ताल शुरू की। जांच के दौरान उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में दर्ज साइबर ठगी की शिकायत के तार रुद्रपुर के एक केनरा बैंक खाते से जुड़े मिले। यह खाता कोटा नारायणपुर निवासी अमन कुमार के नाम पर था।

बैंक स्टेटमेंट खंगालने पर 24 अक्टूबर को नौ अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिये कुल 40,010 रुपये पेट्रोल पंप की पीओएस मशीन से स्वैप किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने संबंधित पेट्रोल पंप पहुंचकर मशीन के इस्तेमाल और लेनदेन की जांच की।

दो प्रतिशत कमीशन लेकर नकदी बांटने का आरोप

जांच में सामने आया कि पीओएस मशीन का इस्तेमाल पेट्रोल पंप पर काम करने वाला सेल्समैन हरीश कुमार कर रहा था। पूछताछ में उसने बताया कि वह एटीएम कार्ड स्वैप कर पेट्रोल पंप के खाते में रकम जमा करवाता था। इसके बाद हैरी नाम के व्यक्ति को नकदी सौंप देता था। इस काम के बदले उसे दो प्रतिशत कमीशन मिलता था।

हरीश से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने अर्जुनपुर निवासी होशियार सिंह उर्फ हैरी को हिरासत में लिया। उसके कमरे की तलाशी में छह अलग-अलग एटीएम कार्ड बरामद हुए। पुलिस अब इन कार्डों और उनसे जुड़े बैंक खातों की भी जांच कर रही है।

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जरूरतमंदों को लालच देकर खुलवाते थे खाते

पूछताछ में होशियार सिंह ने बताया कि वह जरूरतमंद लोगों को रुपये का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद एटीएम कार्ड अपने पास रख लेता था। इन्हीं कार्डों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को निकालने के लिए किया जाता था।

उसने सात अक्टूबर को अपने साथी के साथ शिमला पिस्तौर स्थित सत्संग के पास भारत पेट्रोलियम पंप पर एटीएम कार्ड स्वैप कर 32 हजार रुपये नकद लेने की बात भी स्वीकार की। पुलिस को इस घटना से संबंधित साइबर शिकायत गुजरात में दर्ज मिली है।

दो हजार रुपये में बेच दिया बैंक खाता और एटीएम कार्ड

मामले में खाताधारक अमन कुमार की भूमिका भी जांच में सामने आई। पूछताछ में उसने बताया कि बैंक खाता खुलवाने के बाद उसने अपना एटीएम कार्ड और पासबुक दूसरे व्यक्ति को दो हजार रुपये में दे दिए थे। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जांच के दौरान इस खाते से जुड़ी तीन ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतें मिलीं।

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इनमें श्रावस्ती के एक व्यक्ति से 23 हजार रुपये, हरियाणा की अमनीत कौर से 94,500 रुपये और कर्नाटक के धर्मेंद्र कुमार से 4,995 रुपये की ठगी की शिकायत शामिल है।

पेट्रोल पंप की मशीन तक पहुंची साइबर अपराधियों की चाल

इस मामले ने साइबर अपराधियों के उस तरीके को उजागर किया है, जिसमें बैंक खाते, एटीएम कार्ड और कारोबारी प्रतिष्ठानों की भुगतान मशीनों का कथित दुरुपयोग कर ठगी की रकम को नकदी में बदला जा रहा था। पुलिस ने तीनों आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। अब जांच का दायरा इस बात तक पहुंच गया है कि इस तरीके से और कितने लेनदेन किए गए तथा इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।