यूकेडी कार्यकर्ताओं ने रोका विधायकों का काफिला; पुलिस से भारी धक्का-मुक्की, युवा नेता आशीष नेगी समेत 25 गिरफ्तार
सिमली/गैरसैंण (13 मार्च 2026): गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर आंदोलित उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं ने सिमली बैरियर पर जमकर हंगामा किया। प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा सत्र से लौट रहे दो विधायकों के वाहनों को रोककर नारेबाजी की, जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग कर कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
1. विधायकों के वाहन घेरे, पुलिस के फूले हाथ-पांव
घटना उस समय हुई जब रानीखेत से भाजपा विधायक प्रमोद नैनवाल और लक्सर विधायक मोहम्मद शहजाद एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए भराड़ीसैण से हरिद्वार की ओर जा रहे थे।
-
सिमली में घेराव: सिमली बैरियर पर पहले से डटे यूकेडी कार्यकर्ता अचानक विधायकों की कारों के आगे लेट गए और नारेबाजी शुरू कर दी।
-
सुरक्षा में चूक: अचानक हुए इस प्रदर्शन से मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों में अफरा-तफरी मच गई। विधायकों के वाहन काफी देर तक वहीं फंसे रहे।
2. पुलिस की सख्ती और ‘अस्थाई जेल’ मालसी
कार्यकर्ताओं के न मानने पर पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी। इस दौरान पुलिस और यूकेडी कार्यकर्ताओं के बीच काफी धक्का-मुक्की हुई।
-
गिरफ्तारी: पुलिस ने यूकेडी युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशिष नेगी समेत लगभग 20-25 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। इनमें 4-5 महिला कार्यकर्ता भी शामिल थीं।
-
अस्थाई जेल: गिरफ्तार किए गए सभी प्रदर्शनकारियों को मालसी स्थित अस्थाई जेल भेजा गया।
3. मेडिकल के बाद देर रात रिहाई
यूकेडी कार्यकर्ता देवेंद्र बिष्ट के अनुसार, मालसी जेल में सभी का मेडिकल परीक्षण कराया गया। देर रात शांति व्यवस्था की शर्तों के साथ सभी कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया गया।
Snapshot: सिमली प्रदर्शन और गिरफ्तारी
| विवरण | जानकारी |
| प्रमुख मांग | गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करना |
| निशाने पर विधायक | प्रमोद नैनवाल (BJP) और मोहम्मद शहजाद (Laksar) |
| मुख्य गिरफ्तार चेहरा | आशीष नेगी (युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष, UKD) |
| पुलिस कार्रवाई | हिरासत में लेकर अस्थाई जेल ‘मालसी’ भेजा गया |
| वर्तमान स्थिति | मेडिकल के बाद सभी कार्यकर्ता रिहा |
अधिकारियों का पक्ष
पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि विधायकों की सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था। लोकतांत्रिक विरोध का सम्मान है, लेकिन सुरक्षा घेरा तोड़ना और जनप्रतिनिधियों का रास्ता रोकना कानूनन गलत है।

अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

