उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता: सरकारी विद्यालयों की समयसारिणी एक समान

खबर शेयर करें -

उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता लाने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया गया है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (एससीएफ) की अनुशंसा के तहत राज्यभर के सरकारी विद्यालयों की समयसारिणी एक समान करने का फैसला किया है।

इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) के अनुसार न्यूनतम शिक्षण दिवस सुनिश्चित करना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है।

⏰ नई समयसारिणी के मुख्य प्रविधान

नए प्रविधानों के तहत, अब शीतकालीन और ग्रीष्मकाल में विद्यालयों के खुलने-बंद होने के समय में कोई अंतर नहीं रहेगा।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड ने खोया ईमानदार राजनीति का प्रहरी, बी.सी. खंडूरी के निधन पर भावुक हुए महापौर दीपक बाली
गतिविधि निर्धारित समय/अवधि
विद्यालय खुलने का समय सुबह 8.50 बजे
प्रार्थना सभा 25 मिनट
इंटरवल अवकाश (दोपहर) 40 मिनट
विद्यालय बंद होने का समय (छुट्टी) दोपहर 3.15 बजे
प्रतिदिन कार्यदिवस (एनईपी के अनुसार) न्यूनतम छह घंटे 25 मिनट

आरंभ की तिथि: यह नई समयसारिणी शीतकालीन अवकाश के बाद कुछ विद्यालयों में मॉडल के रूप में 16 जनवरी से आरंभ की जा रही है।

✅ शिक्षण दिवस और अवकाश में कटौती

  • न्यूनतम शिक्षण दिवस: नई पाठ्यचर्या व्यवस्था के तहत अब शैक्षणिक सत्र में अनिवार्य रूप से कम से कम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित किए गए हैं।

    • वर्तमान स्थिति: प्रदेश के अधिकांश सरकारी विद्यालयों में औसतन 200 दिन भी पढ़ाई नहीं हो पा रही है, जबकि एनईपी-2020 के अनुसार न्यूनतम 220 कार्यदिवस आवश्यक हैं।

  • दीर्घ अवकाश: 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने के चलते शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन दीर्घ अवकाशों में कटौती करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है।

यह भी पढ़ें 👉 

🎓 छात्रों को विषय चुनने की स्वतंत्रता

बैठक में यह भी तय किया गया कि कक्षा 11 से छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता दी जाएगी। इससे विद्यार्थी अपनी अभिरुचि और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अध्ययन कर सकेंगे।

यह भी पढ़ें 👉  अजूबा हादसा: स्कूटी से टकराया जंगली हाथी, महिला घायल; टक्कर से टूट गए हाथी दांत के तीन टुकड़े

एससीईआरटी की निदेशक बंदना गर्ब्याल ने बताया कि प्रतिदिन न्यूनतम छह घंटे 25 मिनट का कार्यदिवस तय किया गया है, जो विद्यालयों की कार्य संस्कृति और शैक्षणिक प्रक्रियाओं में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होगा।