मां, भाई और गर्भवती भाभी की तलवार से निर्मम हत्या का मामला: फांसी की सजा के खिलाफ अपील पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रखा

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नैनीताल। टिहरी गढ़वाल के गुमाल गांव में मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की तलवार से काटकर निर्मम हत्या करने वाले दोषी की मृत्युदंड की सजा के खिलाफ दायर याचिका पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ में सोमवार (28 सितंबर) को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने एम्स ऋषिकेश के डॉक्टरों की नवीनतम मेडिकल रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि आरोपी की मानसिक स्थिति में अब काफी सुधार हुआ है और वह बिना किसी सहायता के संवाद करने में सक्षम है।
ट्रायल कोर्ट ने मानसिक स्थिति की जांच कराए बिना सुनाई थी फांसी की सजा: न्याय मित्र
मामले के अनुसार, 13 दिसंबर 2014 को आरोपी संजय सिंह ने मामूली विवाद में अपनी मां, भाई और गर्भवती भाभी की हत्या कर दी थी। घटना के संबंध में उसके पिता राम सिंह पवार ने मामला दर्ज कराया था। अगस्त 2021 में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमा पांडेय की अदालत ने दोषी संजय सिंह को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद वशिष्ठ ने पीठ को बताया कि घटना के समय आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ था और ट्रायल कोर्ट ने सजा सुनाने से पूर्व उसकी मानसिक जांच नहीं कराई थी। हालांकि, एम्स की रिपोर्ट और दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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