उत्तराखंड में मौसम का तांडव: ऑरेंज अलर्ट के बीच भारी बारिश और अंधड़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त
उत्तराखंड में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। पहाड़ से लेकर मैदान तक तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई है, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
क्षेत्रीय मौसम का हाल
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हल्द्वानी और तराई क्षेत्र: सोमवार भोर में करीब तीन बजे से शुरू हुए अंधड़ और मूसलाधार बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है।
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पिथौरागढ़: रात से ही जारी मूसलाधार वर्षा और बादलों की गर्जना से माहौल डरावना बना हुआ है। यहाँ न्यूनतम तापमान गिरकर 9°C तक पहुँच गया है।
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चंपावत और अल्मोड़ा: इन क्षेत्रों में भी तड़के से तेज बारिश और आंधी का दौर जारी है, जिससे बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। चंपावत में न्यूनतम तापमान 11°C रिकॉर्ड किया गया है।
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रानीखेत: तेज हवाओं के साथ बारिश के कारण मुख्य लाइन पर पेड़ की टहनियां गिरने से बिजली गुल है।
नुकसान का विवरण
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बिजली और पानी का संकट: अंधड़ के कारण लाइनों और नलकूपों के संचालन पर असर पड़ा है, जिससे हल्द्वानी सहित कई क्षेत्रों में पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
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आवासीय क्षति: देहरादून के त्यूणी में आंधी-तूफान से 15 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं और कई घरों की छतें उड़ गई हैं。
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कृषि को मार: त्यूणी, टिहरी, उत्तरकाशी और चमोली सहित कई जिलों में गेहूं की 50% फसल, सब्जियां और पेड़ बर्बाद हो गए हैं।
प्रशासनिक सतर्कता और अलर्ट
मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए आगामी दिनों के लिए चेतावनी दी है:
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4 मई: देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, उधम सिंह नगर और चंपावत के लिए अलर्ट।
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5 मई: उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में सतर्क रहने के निर्देश।
महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर सुरक्षा व्यवस्थाओं के संबंध में निर्देश जारी किए हैं:
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यात्रा सावधानी: तीर्थयात्रियों से अपील की गई है कि वे मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करें और अनावश्यक बाहर न निकलें।
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हेली सेवा: खराब मौसम के दौरान चारधाम हेली सेवाओं के संचालन पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
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गंगा घाटों पर अलर्ट: ऋषिकेश में एसडीआरएफ को अलर्ट किया गया है और पर्यटकों को गंगा के बढ़ते जलस्तर के प्रति सचेत किया जा रहा है।
राजकीय और जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है。
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