
राजू अनेजा,काशीपुर। करीब सात साल पुराने आर्म्स एक्ट के एक मुकदमे में अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश की जोरदार पैरवी के आगे अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका और अदालत ने आरोपी को दोषमुक्त करार दे दिया। मामला Arms Act की धारा 3/25 से जुड़ा था।
जानकारी के अनुसार मोहल्ला वाल्मीकि बस्ती, काशीपुर निवासी आलोक कुमार पुत्र स्व. रामगोपाल के खिलाफ दरोगा मुकेश मिश्रा की ओर से 30 अप्रैल 2019 की घटना को लेकर 1 मई 2019 को कोतवाली काशीपुर में एफआईआर संख्या 188/2019 दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।
विवेचना पूरी होने के बाद काशीपुर पुलिस ने 23 दिसंबर 2019 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। इसके बाद मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट/द्वितीय अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत में विचाराधीन रहा।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश ने प्रभावी ढंग से पैरवी की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 6 मार्च 2026 को फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा है।
अदालत ने साक्ष्यों के अभाव को देखते हुए आरोपी आलोक कुमार को आरोपों से बरी कर दिया।


