गुलदार का आतंक: चारा लेने गए बुजुर्ग को बनाया निवाला, वन मंत्री के गृह क्षेत्र में 5वीं मौत से भारी आक्रोश

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पौड़ी: जनपद के विकासखंड पौड़ी अंतर्गत कमंद गांव में गुलदार ने एक 62 वर्षीय बुजुर्ग को अपना निवाला बना लिया है। इस हृदयविदारक घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत और वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। मृतक की पहचान मोहन चंद्र मलासी (62 वर्ष) के रूप में हुई है। घटना शुक्रवार शाम करीब सात बजे की बताई जा रही है, जब बुजुर्ग घर से महज 200 मीटर दूर खेत में बकरियों के लिए चारा लेने गए थे।

घात लगाकर किया हमला, 300 मीटर दूर मिला शव

परिजनों के अनुसार, मोहन चंद्र मलासी शाम साढ़े छह बजे चारा पत्ती लेने खेत गए थे। जब वह पेड़ से चारा काटकर जमीन पर उतरे, तभी घात लगाए गुलदार ने उन पर हमला कर दिया। काफी देर तक घर न लौटने पर परिजनों ने खोजबीन शुरू की। खेत में उनकी दरांती और चप्पल पड़ी मिली, जिसके बाद खून के निशानों का पीछा करते हुए ग्रामीण करीब 300 मीटर आगे पहुंचे, जहां बुजुर्ग का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ।

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वन मंत्री के गृह क्षेत्र में पांचवीं बलि; ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पौड़ी वन मंत्री सुबोध उनियाल का गृह क्षेत्र है और पिछले कुछ महीनों में यहाँ गुलदार के हमले में यह पांचवीं मौत है। इससे पहले बमठी, बालमणा, बाड़ा और गजल्ड गांव में भी गुलदार इंसानों को शिकार बना चुका है। घटना के बाद प्रशासन और वन विभाग की टीम जब मौके पर पहुंची, तो उन्हें ग्रामीणों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। स्थानीय विधायक के देरी से पहुंचने को लेकर भी सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने कड़ी नाराजगी जताई।

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“गांव बचाने हैं तो गुलदार मारो, वरना हमें मार दो”

ग्राम प्रधान थली साधना देवी ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र में लगातार गुलदार की धमक बनी हुई है, लेकिन विभाग सुध नहीं ले रहा। उन्होंने आक्रोशित लहजे में कहा, “यदि गांव बचाने हैं तो गुलदारों को मार दो, और यदि गुलदार बचाने हैं तो ग्रामीणों को मार दो।” ग्रामीण अब गुलदार को आदमखोर घोषित कर उसे ढेर करने की मांग कर रहे हैं।

आदमखोर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू

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गढ़वाल डीएफओ महातिम यादव ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से दूरभाष पर वार्ता कर गुलदार को आदमखोर घोषित करने का अनुरोध किया गया है ताकि क्षेत्र के लोगों को इस खतरे से निजात दिलाई जा सके। फिलहाल, गांव में वन विभाग की टीम गश्त कर रही है, लेकिन ग्रामीण ठोस कार्रवाई होने तक शांत होने को तैयार नहीं हैं।