हरदोई से उठी मांग का बड़ा असर: उत्तर प्रदेश में बाल कल्याण समितियों के पुनर्गठन की कवायद तेज; शासन ने निदेशक को दिए कार्रवाई के निर्देश
हरदोई/लखनऊ: जनपद हरदोई से शुरू हुई बाल कल्याण समितियों (CWC) के पुनर्गठन की मांग अब पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है। प्रहलाद नगरी जन कल्याण समिति के अध्यक्ष शिवम द्विवेदी द्वारा महिला कल्याण विभाग को भेजे गए एक महत्वपूर्ण पत्र का उत्तर प्रदेश शासन ने कड़ा संज्ञान लिया है। शासन ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग के निदेशक को नियमानुसार आवश्यक और त्वरित कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।
कार्यकाल पूरा होने के बाद भी नई समितियों के गठन में देरी पर उठाए सवाल
प्रहलाद नगरी जन कल्याण समिति द्वारा बीते 11 मई 2026 को महिला कल्याण विभाग को एक शिकायती व मांग पत्र भेजा गया था। पत्र के माध्यम से शासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा गया था कि हरदोई सहित उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों में संचालित बाल कल्याण समितियों का तय तीन वर्ष का वैधानिक कार्यकाल काफी समय पहले पूरा हो चुका है। इसके बावजूद, अब तक शासन या विभाग की ओर से नई समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। समिति ने मांग उठाई कि नियमों के मुताबिक नए अध्यक्ष और सदस्यों के चयन के लिए तत्काल आधिकारिक विज्ञापन जारी किया जाए और पुनर्गठन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा कराया जाए, ताकि सूबे में बाल संरक्षण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ व प्रभावी बनाया जा सके।
अनु सचिव ने निदेशक को जारी किया पत्र, नियमानुसार कदम उठाने के आदेश
इस जनहित से जुड़े मामले में तत्परता दिखाते हुए महिला कल्याण अनुभाग-1 के अनु सचिव अवनीश कुमार सिंह ने निदेशक, महिला कल्याण (उत्तर प्रदेश) को एक आधिकारिक पत्र प्रेषित किया है। शासन स्तर से जारी इस पत्र में स्पष्ट तौर पर निर्देशित किया गया है कि प्रहलाद नगरी जन कल्याण समिति से प्राप्त प्रार्थना पत्र का भली-भांति संज्ञान लेते हुए, स्थापित नियमों और प्रावधानों के आधार पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं।
क्यों महत्वपूर्ण है बाल कल्याण समितियों (CWC) का समय पर गठन?
कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि बाल कल्याण समितियां (Child Welfare Committees) संकटग्रस्त, अनाथ, भटके हुए और बाल श्रम व तस्करी से मुक्त कराए गए बच्चों के संरक्षण, देखरेख, पुनर्वास तथा उनके न्यायिक मामलों के निपटारे में एक मजिस्ट्रेट की तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में इन संवेदनशील समितियों का समय पर पुनर्गठन न होने से जिलों में बच्चों से जुड़े कई प्रशासनिक और कानूनी मामलों पर सीधा असर पड़ता है और उनके अधिकारों की रक्षा में देरी होती है।
समिति के अध्यक्ष शिवम द्विवेदी ने शासन के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि नई, ऊर्जावान और योग्य टीमों को अवसर मिलने से इन समितियों की कार्यक्षमता और पारदर्शिता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे बेसहारा बच्चों को समय पर बेहतर न्याय और संरक्षण मिल सकेगा। बहरहाल, शासन के इस कड़े रुख के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में जल्द ही CWC के पुनर्गठन की प्रक्रिया युद्धस्तर पर तेज हो जाएगी।
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