राजू अनेजा,बाजपुर । उत्तराखंड में संदिग्ध दवाओं और अवैध शराब के संभावित नेटवर्क पर शनिवार देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए एसटीएफ, ड्रग विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने हाईवे स्थित कोवियल बायोटेक फैक्ट्री पर छापा मारा। कई घंटे चली इस कार्रवाई में लाखों रुपये मूल्य की संदिग्ध अंग्रेजी दवाएं और करीब 100 पेटी हरियाणा निर्मित शराब बरामद की गई। प्रारंभिक जांच के बाद फैक्ट्री को सील कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
देर रात अचानक पहुंची कई विभागों की संयुक्त टीम
जानकारी के अनुसार शनिवार देर रात एसटीएफ, ड्रग विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस की कई गाड़ियां अचानक हाईवे स्थित जियो पेट्रोल पंप के सामने हिमालयन फैक्ट्री के पास स्थित कोवियल बायोटेक फैक्ट्री पहुंचीं। कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय रखी गई थी, जिससे फैक्ट्री प्रबंधन को पहले से भनक तक नहीं लग सकी। संयुक्त टीम ने पहुंचते ही फैक्ट्री और गोदाम को अपने कब्जे में लेकर अंदर मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ शुरू कर दी।
ड्रग इंस्पेक्टर की मौजूदगी में खंगाला गया पूरा स्टॉक
ड्रग इंस्पेक्टर नीरज कुमार और निधि शर्मा की मौजूदगी में फैक्ट्री में रखी दवाओं के स्टॉक, निर्माण रिकॉर्ड, बैच नंबर, लाइसेंस और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की गई। प्रारंभिक जांच में बड़ी मात्रा में अंग्रेजी दवाएं संदिग्ध प्रतीत होने पर टीम ने उन्हें कब्जे में ले लिया। इसके बाद फैक्ट्री को एहतियातन सील कर दिया गया ताकि जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके।
गोदाम से मिली 100 पेटी हरियाणा निर्मित शराब
जांच के दौरान टीम ने जब गोदाम की तलाशी ली तो वहां से करीब 100 पेटी हरियाणा निर्मित शराब बरामद हुई। बायोटेक फैक्ट्री के परिसर से शराब मिलने के बाद अधिकारियों के भी होश उड़ गए। बरामद शराब वहां किस उद्देश्य से रखी गई थी और उसका फैक्ट्री से क्या संबंध है, इसकी जांच की जा रही है। साथ ही अन्य नशीले पदार्थों की मौजूदगी को लेकर भी सघन तलाशी अभियान चलाया गया।
दस्तावेजों और स्टॉक का देर रात तक चलता रहा मिलान
संयुक्त टीम देर रात तक फैक्ट्री में मौजूद स्टॉक, रजिस्टर, खरीद-बिक्री के दस्तावेज, बिल और अन्य रिकॉर्ड का मिलान करती रही। अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। जांच का फोकस इस बात पर भी है कि बरामद दवाएं वैध हैं या नकली, एक्सपायरी हैं या बिना अनुमति के तैयार अथवा संग्रहित की गई थीं।
बड़े नेटवर्क की आशंका, कई विभाग कर रहे संयुक्त जांच
सूत्रों के अनुसार मामले को केवल संदिग्ध दवाओं या शराब तक सीमित नहीं माना जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं इसके पीछे दवाओं और अवैध शराब की सप्लाई से जुड़ा कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। इसी कारण एसटीएफ, ड्रग विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से पूरे मामले की पड़ताल कर रहे हैं।
इन अधिकारियों की रही अहम भूमिका
कार्रवाई में एसटीएफ निरीक्षक विकास चौधरी, एसआई विपिन जोशी, एसआई केजी मठपाल, ड्रग इंस्पेक्टर नीरज कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर निधि शर्मा, दोराहा पुलिस चौकी प्रभारी सुरेंद्र सिंह सहित एसटीएफ, ड्रग विभाग, राजस्व विभाग एवं स्थानीय पुलिस के कई अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे।
आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल बरामद दवाओं और शराब के नमूनों की जांच की जा रही है। संबंधित विभागों की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बरामद सामग्री नकली, अवैध या नियमों के विपरीत रखी गई थी या नहीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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