मोबाइल में ‘डिलीवर’ दिखाकर आखिर किसके घर जल रहा है चूल्हा? सिलेंडर के आगे सिस्टम सरेंडर

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राजू अनेजा, काशीपुर। शहर में घरेलू गैस सिलेंडर की किल्लत अब आम समस्या नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी विफलता बनती जा रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब कई उपभोक्ताओं के मोबाइल में सिलेंडर “डिलीवर”तो दिखाया जा रहा है, लेकिन उनके घरों में चूल्हा ठंडा पड़ा है। इस पूरे मामले ने गैस वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

एजेंसियों पर सुबह से लाइन, आदेश बेअसर

सिलेंडर को लेकर हो रही मारो मार के चलते शहर की गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। लोग खाली सिलेंडर लेकर एजेंसी पहुंच रहे हैं, जबकि जिला प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गैस की सप्लाई केवल होम डिलीवरी के माध्यम से ही की जाएगी। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर आदेशों की अनदेखी हो रही है और लोग दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

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हजारों में पहुंचा बैकलॉग

मिली जानकारी के अनुसार इस समय शहर की प्रमुख गैस एजेंसियों में उपभोक्ताओं का भारी दबाव है।नेहा इंडेन गैस एजेंसी में करीब 30 हजार उपभोक्ताओं के बीच बैकलॉग ढाई हजार तक पहुंच चुका है। जबकि निर्भय गैस एजेंसी में 24 हजार उपभोक्ताओं के सापेक्ष 2300 से अधिक बुकिंग लंबित हैं।काशीपुर गैस सर्विस और श्री साईं गैस सर्विस में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है।मंगलवार को सप्लाई आने के बावजूद हालात सामान्य नहीं हो सके। नेहा एजेंसी में करीब 900 सिलेंडर पहुंचे, जबकि निर्भय एजेंसी में महज 342 सिलेंडर की आपूर्ति हुई। यह संख्या बढ़ती मांग के मुकाबले बेहद कम साबित हो रही है।

 

‘डिलीवर’ का मैसेज, लेकिन गैस गायब

सबसे गंभीर और चौंकाने वाली बात यह है कि कई उपभोक्ताओं के मोबाइल पर बिना सिलेंडर मिले ही “डिलीवर” का मैसेज आ जा रहा है ।गैस एजेंसी की लाइन में खड़े उपभोक्ताओं का कहना है कि एक सप्ताह पहले बुकिंग कराने के बाद भी गैस नहीं मिल रही, लेकिन रिकॉर्ड में डिलीवरी दिखा दी जा रही है। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है और गड़बड़ी की आशंका भी गहरा रही है।

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अफसरों के दावे और हकीकत में फर्क

अधिकारियों का कहना है कि शहर में गैस की कोई कमी नहीं है और पुरानी बुकिंग वालों को प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है।
हालांकि जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। उपभोक्ता एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बचते दिख रहे हैं।

कॉमर्शियल सिलेंडर भी संकट में

घरेलू गैस के साथ-साथ कॉमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति भी प्रभावित हो गई है। फिलहाल जो सिलेंडर उपलब्ध हो रहे हैं, उन्हें अस्पतालों और सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील के लिए आरक्षित किया गया है। इससे छोटे व्यापारियों और ढाबा संचालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

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उठ रहे बड़े सवाल

मोबाइल में “डिलीवर” दिखाकर आखिर सिलेंडर कहां जा रहे हैं?
क्या सिस्टम में कोई बड़ी गड़बड़ी है या फिर कालाबाजारी का खेल चल रहा है?
इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।
इतना जरूर है कि गैस की यह किल्लत अब आम आदमी के धैर्य की परीक्षा लेने लगी है और सिस्टम पूरी तरह से बैकफुट पर नजर आ रहा है।

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