देहरादून/गाजीपुर (25 मार्च 2026): सैन्य अभ्यास के दौरान घटित इस दुखद घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि एक भारतीय सैनिक के लिए अपने साथी का जीवन और देश की आन-बान-शान अपनी जान से बढ़कर होती है।
1. 20 मार्च की वो घटना: बहादुरी की मिसाल
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घातक प्लाटून प्रतियोगिता: भैरव बटालियन की इस चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिता के दौरान कैप्टन चौरसिया अपनी टीम का नेतृत्व कर रहे थे।
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संकट की घड़ी: नदी पार करने के दौरान उनकी टीम का एक जवान तेज बहाव और खतरों के बीच फंस गया। अपने साथी को संकट में देख कैप्टन ने बिना एक पल गंवाए उसे बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी।
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घातक चोट: साथी को सुरक्षित निकालते समय कैप्टन प्रशांत का सिर पानी के नीचे एक चट्टान (पत्थर) से जोर से टकरा गया, जिससे उन्हें गंभीर आंतरिक चोटें आईं।
2. अस्पताल में संघर्ष और अंतिम विदाई
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इलाज: उन्हें तुरंत देहरादून स्थित मिलिट्री अस्पताल (MH) ले जाया गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने का हर संभव प्रयास किया।
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शहादत: लगभग चार दिनों तक जीवन और मौत के बीच जूझते हुए, इस वीर सेनानी ने रविवार (22 मार्च) को अस्पताल में अंतिम सांस ली।
3. परिवार का इकलौता सहारा और गौरव
कैप्टन प्रशांत चौरसिया अपने परिवार की उम्मीदों का केंद्र थे:
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पारिवारिक पृष्ठभूमि: वे तीन भाई-बहनों में मंझले थे। उनकी बड़ी बहन सलोनी की शादी अभी पिछले महीने ही संपन्न हुई थी, जिसकी खुशियां अभी घर में थमी भी नहीं थीं। छोटा भाई मयंक घर पर रहकर माता-पिता का हाथ बंटाता है।
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गाजीपुर का मान: वीरों की धरती गाजीपुर ने एक और लाल देश की वेदी पर न्योछावर कर दिया है। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई है।
Snapshot: शहीद कैप्टन प्रशांत चौरसिया
| विवरण | जानकारी |
| नाम | कैप्टन प्रशांत चौरसिया |
| निवासी | जनपद गाजीपुर, उत्तर प्रदेश |
| यूनिट | भैरव बटालियन (घातक प्लाटून) |
| बलिदान की तिथि | 22 मार्च 2026 (अस्पताल में निधन) |
| वीरता का कार्य | डूबते हुए साथी जवान की जान बचाई |

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