उत्तराखंड में प्री-मानसून की आक्रामकता से बढ़ी चिंता: 25 जून तक पहुंचेगा मानसून, कुल वर्षा 5 से 8% कम रहने का अनुमान; विशेषज्ञों ने दी कम समय में भारी बारिश की चेतावनी
देहरादून, 15 जून 2026: उत्तराखंड में मानसून की आधिकारिक दस्तक होने में अभी कुछ दिन बाकी हैं, लेकिन उससे पहले ही मौसम के बदले और उग्र मिजाज ने राज्य के नागरिकों और प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मई और जून के महीनों में लगातार हुई भारी बारिश, तेज अंधड़ और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं ने लोगों के मन में यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि इस बार मानसून का स्वरूप कैसा होगा। हालांकि, देश के दक्षिणी हिस्सों से आगे बढ़ते हुए मानसून तेजी से उत्तर भारत की ओर अग्रसर है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, आगामी 25 जून 2026 तक मानसून के उत्तराखंड पहुंचने की विधिक संभावना जताई गई है, लेकिन इससे पूर्व सक्रिय हुई प्री-मानसून गतिविधियां डराने वाली साबित हो रही हैं।
मई में टूटा 86 साल का रिकॉर्ड; जून में भी जनजीवन प्रभावित
इस वर्ष मई महीने का मौसम सामान्य वर्षों की तुलना में अत्यधिक असामान्य दर्ज किया गया। लगातार सक्रिय रहे पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और विशेष मौसम प्रणालियों के कारण प्रदेश के अधिकांश जनपदों में औसत से काफी अधिक जलवर्षा हुई। राजधानी देहरादून में तो एक ही दिन में हुई भारी बारिश ने 86 वर्षों का ऐतिहासिक रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। जून महीने में भी यही आक्रामक सिलसिला जारी है। राज्य के विभिन्न पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही वर्षा, अंधड़ और बिजली चमकने से पेड़ उखड़ने, विद्युत लाइनों के क्षतिग्रस्त होने तथा सामान्य जनजीवन के बुरी तरह प्रभावित होने की विधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान: सामान्य से थोड़ी कम होगी मानसूनी बारिश
प्री-मानसून के इस उग्र व्यवहार के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की भविष्यवाणी थोड़ी भिन्न और पहली नजर में राहत देने वाली तस्वीर पेश करती है। मौसम वैज्ञानिकों के आधिकारिक पूर्वानुमान के अनुसार:
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वर्षा का प्रतिशत: इस बार संपूर्ण मानसून सीजन के दौरान उत्तराखंड राज्य में सामान्य से करीब 5 से 8 प्रतिशत कम बारिश होने की संभावना है।
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औसत मात्रा: पूरे सीजन में कुल वर्षा की मात्रा दीर्घकालिक औसत से थोड़ी कम दर्ज की जा सकती है।
आपदा प्रबंधन विभाग की तैयारियां पूरी, संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर
भले ही कुल बारिश का अनुमान सामान्य से कम हो, लेकिन आपदाओं के विधिक शमन और प्रबंधन के लिए राज्य सरकार पूरी तरह मुस्तैद हो गई है। संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, बादल फटने और नदी-नालों के उफान की विधिक चुनौतियों से निपटने के लिए अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
“मानसून सीजन की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य के सभी जिलों में आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर दी गई हैं। भूस्खलन और बाढ़ प्रभावित संवेदनशील क्षेत्रों (Hotspots) की विधिक पहचान कर वहां विशेष सर्विलांस और फील्ड स्तर पर त्वरित राहत दलों (Quick Response Teams) की तैनाती के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि किसी भी आपातकालीन आपदा की स्थिति में बिना किसी विधिक ढिलाई के तत्काल और प्रभावी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा सके।”
— विनोद कुमार सुमन, सचिव, उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग
विशेषज्ञों की राय: कुल आंकड़ों के भ्रम में न रहें, ‘क्लाइमेट चेंज’ से बढ़ा फ्लैश फ्लड का खतरा
हिमालयी पर्यावरण और मौसम प्रणालियों का गहन अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक और भू-गर्भ शास्त्री मौसम विभाग के ‘कम बारिश’ वाले आंकड़ों को लेकर आगाह कर रहे हैं। विशेषज्ञों का स्पष्ट विधिक मत है कि आपदा का संबंध कुल बारिश की मात्रा से नहीं, बल्कि उसकी तीव्रता (Intensity) से होता है।
“मानसून के दौरान कुल बारिश कम होने का अनुमान लोगों को किसी भ्रम में नहीं रखना चाहिए। पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण वर्षा का पारंपरिक पैटर्न पूरी तरह बदल चुका है। अब लंबे समय तक धीरे-धीरे होने वाली बारिश के बजाय कम समय में अत्यधिक तीव्र बारिश (Cloudburst or Extreme Rainfall) की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। यही कारण है कि हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Flood) और भूस्खलन (Landslide) की विधिक विभीषिका ज्यादा देखने को मिल रही है।”
— प्रोफेसर एसपी सती, हिमालयी पर्यावरण विशेषज्ञ
विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान में निरंतर वृद्धि और ग्लेशियरों के असामान्य व्यवहार के कारण पर्वतीय राज्यों के लिए मौसम की यह मार विशेष चिंता का विषय है, क्योंकि एक ओर जहां चारधाम यात्रा और पर्यटन गतिविधियां सीधे प्रभावित होती हैं, वहीं नदी घाटियों में बसी एक बड़ी आबादी हमेशा खतरे की जद में रहती है। फिलहाल, 25 जून की आधिकारिक समय-सीमा को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन अपनी विधिक तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

