बेटियों ने निभाई बेटे की जिम्मेदारी; 85 वर्षीय मां को दी मुखाग्नि, रूढ़ियों को तोड़ पेश की मिसाल

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बागेश्वर (9 मार्च 2026): बागेश्वर के काफलीगैर तहसील अंतर्गत लोब गांव में एक अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। यहाँ 85 वर्षीय बिश्नुली देवी के निधन के बाद उनकी बेटियों ने परंपरागत मान्यताओं से ऊपर उठकर अपनी मां का अंतिम संस्कार किया और उन्हें मुखाग्नि दी।

सरयू-गोमती तट पर अंतिम विदाई

सोमवार को बिश्नुली देवी का स्वर्गवास हो गया था। उनके अंतिम संस्कार के लिए परिजनों और ग्रामीणों ने बागेश्वर स्थित सरयू-गोमती के संगम तट पर प्रस्थान किया।

  • बेटियों का साहस: जब अंतिम विदाई का समय आया, तो उनकी बेटियों ने स्वयं आगे आकर मुखाग्नि देने का निर्णय लिया।

  • मार्मिक क्षण: श्मशान घाट पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें इस दृश्य को देखकर नम हो गईं। समाज में आमतौर पर बेटों द्वारा ही मुखाग्नि देने की परंपरा रही है, लेकिन इन बेटियों ने इस धारणा को बदल दिया।

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प्रेरणा बनीं बेटियां

अंतिम संस्कार की रस्म निभाने वाली बेटियों में गोविंदी लोबियाल (पत्नी रमेश चंद्र) और लीला देवी (पत्नी शिव लाल) शामिल थीं।

  • सामाजिक पहचान: उल्लेखनीय है कि गोविंदी लोबियाल वर्तमान में हल्द्वानी के दमुवाढूंगा क्षेत्र में महिला कांग्रेस की ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में सक्रिय सामाजिक और राजनीतिक भूमिका निभा रही हैं।

  • मातृभक्ति: बेटियों ने नम आंखों से अपनी मां को अंतिम विदाई दी, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना की जा रही है।

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ग्रामीणों और गणमान्य लोगों की उपस्थिति

अंतिम संस्कार के दौरान भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे, जिनमें राजेंद्र प्रसाद, मनोज कुमार टम्टा, विवेक लोबियाल, सूरज कुमार, चंद्रशेखर और संजय कुमार प्रमुख थे। ग्रामीणों ने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

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Snapshot: एक नज़र में

विवरण जानकारी
दिवंगत बिश्नुली देवी (85 वर्ष)
स्थान लोब गांव, काफलीगैर (बागेश्वर)
मुखाग्नि देने वाली बेटियां गोविंदी लोबियाल और लीला देवी
संदेश बेटा-बेटी एक समान, रूढ़िवादी परंपराओं का अंत

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