सेवा भाव की मिसाल थे डॉ. डिमरी: नारायणबगड़ में ओपीडी के कुछ ही देर बाद हादसे का शिकार हुए प्रभारी चिकित्साधिकारी, पिंडर घाटी में शोक की लहर

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नारायणबगड़ (चमोली)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) नारायणबगड़ के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. नवीन चंद्र डिमरी के असामयिक और दर्दनाक निधन से हर कोई गहरे सदमे में है। स्थानीय जनता के लिए इस बात पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि जो डॉक्टर कुछ ही देर पहले ओपीडी में मुस्तैदी से मरीजों की नब्ज टटोल रहे थे, वे अचानक एक खौफनाक हादसे का शिकार हो जाएंगे। डॉ. नवीन अपने बेहद सरल, सहज और समर्पित सेवा भाव के लिए पूरी पिंडर घाटी में बेहद लोकप्रिय थे। मरीजों के प्रति उनकी मानवीय संवेदनाओं और विनम्र व्यवहार का ही असर था कि देवाल, थराली और ग्वालदम जैसे दूरस्थ ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग सिर्फ उनके पास ही इलाज कराने आते थे।

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मूल रूप से गोपेश्वर के देवलधार निवासी डॉ. नवीन अस्पताल परिसर के ही सरकारी आवास में रहते थे, जबकि उनका परिवार कर्णप्रयाग में रहता है। उनके परिवार में पत्नी, जो प्राथमिक विद्यालय नलगांव में शिक्षिका हैं, और एक 10 वर्ष का बेटा है। डॉ. डिमरी के लिए मरीजों की सेवा ही सर्वोच्च प्राथमिकता थी; वे रात को दो या तीन बजे भी किसी मरीज के आने पर बिना किसी झिझक के खुद उपचार के लिए खड़े हो जाते थे। उनके इसी जज्बे के चलते थराली विधायक भूपाल राम टम्टा, पूर्व ब्लॉक प्रमुख यशपाल सिंह, प्रमुख गणेश चंदोला और व्यापार संघ अध्यक्ष जयवीर सिंह सहित तमाम जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों ने उनके निधन को चिकित्सा जगत और समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति बताते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है।

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पिछले वर्ष ही हुई थी जर्जर दीवार की मरम्मत

हादसे का कारण बनी यह सुरक्षा दीवार वर्ष 2014-15 में निर्मित हुई थी। इसके जर्जर होने पर साल 2024-25 में ग्रामीण निर्माण विभाग द्वारा इसकी मरम्मत भी कराई गई थी। लेकिन बीते 25 जून को हुई भारी बारिश के कारण मलबे के दबाव से दीवार का निचला हिस्सा एक बार फिर क्षतिग्रस्त हो गया था। मानसून के दौरान कोई बड़ा हादसा न हो, इसी एहतियात के साथ शनिवार से ही इस दीवार की दोबारा मरम्मत का काम शुरू कराया गया था। डॉ. नवीन खुद इसी कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि जिस दीवार को वे सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहे थे, वही उनके लिए काल बन जाएगी।

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