ईरान-इजरायल युद्ध का असर: ऊधम सिंह नगर में डामर के दाम दोगुने; 375 सड़कों का निर्माण ठप, ठेकेदारों के सामने ‘इधर कुआं-उधर खाई’
रुद्रपुर (25 मार्च 2026): जिले में विकास कार्यों की रफ्तार पर ‘ब्रेक’ लग गया है। जनवरी-फरवरी में जिन रेट्स पर ठेकेदारों ने टेंडर लिए थे, अब उन दामों पर काम करना उनके लिए आर्थिक रूप से आत्मघाती साबित हो रहा है।
1. डामर की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी (गणित समझिए)
युद्ध शुरू होने से पहले और अब की कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर आ गया है:
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पुराना रेट (जनवरी-फरवरी): ₹38 प्रति किलो।
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वर्तमान रेट: ₹58 प्रति किलो।
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GST का बोझ: 18% जीएसटी जुड़ने के बाद प्रभावी कीमत ₹71-72 प्रति किलो तक पहुँच रही है।
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निष्कर्ष: डामर की लागत लगभग दोगुनी हो गई है, जबकि टेंडर पुराने रेट पर ही फिक्स हैं।
2. ठेकेदारों का संकट: काम करें तो घाटा, न करें तो कार्रवाई
जिले के ठेकेदारों के सामने अब दोहरी मुसीबत है:
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नुकसान: पुराने रेट पर डामरीकरण करने से भारी वित्तीय घाटा तय है।
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विभागीय पेच: यदि काम समय पर शुरू नहीं किया तो विभाग पेनाल्टी लगा सकता है या ब्लैकलिस्ट कर सकता है।
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नया झटका: 1 अप्रैल 2026 से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) डामर की कीमतों में और बढ़ोतरी करने जा रहा है, जिससे स्थिति और विकट हो जाएगी।
3. विभाग और प्रशासन की प्रतिक्रिया
लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी भी इस वैश्विक संकट के सामने खुद को बेबस पा रहे हैं:
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पौने चार सौ सड़कें प्रभावित: निर्माण विंग के अनुसार, पूरे जिले में करीब 375 सड़कों का डामरीकरण होना है, जो फिलहाल रुका पड़ा है।
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अधीक्षण अभियंता का बयान: PWD के अधीक्षण अभियंता अनिल पांगती के अनुसार, समस्या गहरा रही है। यदि युद्ध लंबा चला तो परिस्थितियों के हिसाब से शासन स्तर पर कोई निर्णय लिया जाएगा।
Snapshot: ऊधम सिंह नगर सड़क संकट 2026
| विवरण | वर्तमान स्थिति |
| प्रभावित सड़कें | करीब 375 (पूरे जिले में) |
| डामर की कीमत (पुरानी) | ₹38/किग्रा |
| डामर की कीमत (नई + GST) | ₹71-72/किग्रा |
| प्रमुख कारण | ईरान-इजरायल युद्ध (कच्चे तेल की आवक कम होना) |
| अगली चुनौती | 1 अप्रैल से IOC द्वारा कीमतों में और बढ़ोतरी |

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