मानवता की मिसाल: उत्तरकाशी और देहरादून के DM ने बचाई नवजात की जान; आयुष्मान कार्ड न मानने वाले निजी अस्पताल को दिए सख्त निर्देश
उत्तरकाशी/देहरादून (30 मार्च 2026): चिन्यालीसौड़ के एक नवजात शिशु के इलाज में आ रही वित्तीय बाधा को दूर करते हुए जिला प्रशासन ने यह साबित कर दिया कि नियम प्रक्रियाओं से ऊपर जीवन की रक्षा है।
1. घटना का क्रम: अस्पताल से घर जाने के बाद बिगड़ी तबीयत
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प्रसव: 22-23 मार्च को चिन्यालीसौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में आशीष (निवासी सुदूरवर्ती गांव) की पत्नी ने बच्चे को जन्म दिया।
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लापरवाही: परिजन जच्चा-बच्चा को निर्धारित 48 घंटे की निगरानी में रखने के बजाय जल्दी घर ले गए।
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स्वास्थ्य संकट: घर पहुँचने के बाद नवजात में पीलिया (Jaundice) के लक्षण दिखे और तबीयत बिगड़ने लगी। परिजन उसे जिला अस्पताल लाए, जहाँ से उसे देहरादून हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
2. निजी अस्पताल की मनमानी और आर्थिक संकट
देहरादून के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने पर प्रबंधन ने तकनीकी कारणों (डिस्चार्ज पेपर की कमी आदि) का हवाला देकर आयुष्मान कार्ड लगाने से मना कर दिया और 25,000 रुपये जमा करने को कहा। गरीब परिवार के पास इतनी बड़ी रकम तुरंत उपलब्ध नहीं थी।
3. ‘एक्शन मोड’ में आए दोनों जिलों के जिलाधिकारी
जैसे ही मामला संज्ञान में आया, उत्तरकाशी के DM प्रशांत आर्य और देहरादून के DM सविन बंसल ने मोर्चा संभाला:
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दस्तावेज पूर्ति: DM उत्तरकाशी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल रेफरल और अन्य जरूरी कागजात तैयार कर देहरादून भिजवाए।
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अस्पताल को निर्देश: दोनों जिलाधिकारियों ने निजी अस्पताल प्रबंधन को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि नियमों का हवाला देकर इलाज न रोका जाए।
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नतीजा: प्रशासन के दबाव के बाद अस्पताल ने बिना अग्रिम भुगतान के मासूम का इलाज शुरू किया, जिससे उसकी स्थिति अब खतरे से बाहर है।
4. स्वास्थ्य विभाग की सलाह
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. बी.एस. रावत ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अपील की है कि प्रसव के बाद कम से कम दो दिनों तक अस्पताल में ही रहें। यदि परिजन नियमों का पालन करते, तो समय रहते पीलिया के लक्षणों की पहचान वहीं हो जाती और रेफरल के कागजात भी साथ होते।
Snapshot: नवजात जीवन रक्षा मिशन 2026
| विवरण | जानकारी |
| पीड़ित परिवार | आशीष (उत्तरकाशी का सुदूरवर्ती गांव) |
| बीमारी | नवजात में पीलिया के लक्षण |
| प्रशासनिक हस्तक्षेप | DM प्रशांत आर्य (उत्तरकाशी) एवं DM सविन बंसल (देहरादून) |
| मुख्य बाधा | निजी अस्पताल द्वारा आयुष्मान कार्ड स्वीकार न करना |
| वर्तमान स्थिति | शिशु का इलाज जारी, परिवार ने जताया आभार |

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