विधायक निधि खर्च में गोपाल राणा अव्वल, यशपाल आर्य फिसड्डी; त्रिलोक सिंह चीमा तीसरे पायदान पर

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उधमसिंह नगर के विधायकों का विकास रिपोर्ट कार्ड जारी, 213.75 करोड़ में खर्च हुए 145.86 करोड़

नानकमत्ता विधायक ने खर्च की 74 फीसदी निधि, बाजपुर विधायक 55 फीसदी पर अटके; काशीपुर के त्रिलोक चीमा 71 प्रतिशत खर्च के साथ तीसरे पायदान पर

राजू अनेजा, काशीपुर।उधमसिंह नगर जिले के मौजूदा विधायकों का विकास रिपोर्ट कार्ड सामने आया है। विधायक निधि के इस्तेमाल को लेकर सामने आए सरकारी आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि विकास कार्यों के लिए मिलने वाली करोड़ों रुपये की धनराशि को खर्च करने में सभी विधायक एक समान रफ्तार से आगे नहीं बढ़ रहे हैं। निधि खर्च करने में नानकमत्ता विधायक गोपाल सिंह राणा जिले में अव्वल हैं, जबकि बाजपुर विधायक यशपाल आर्य सबसे निचले पायदान पर हैं।

काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने उत्तराखंड के आयुक्त ग्राम्य विकास कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी से मौजूदा विधायकों द्वारा खर्च की गई विधायक निधि का विवरण मांगा था। इसके जवाब में लोक सूचना अधिकारी/उपायुक्त (प्रशासन) ग्राम्य विकास हेमंती गुंजियाल ने वर्ष 2022-23 से 2025-26 तथा जून 2026 तक का विवरण उपलब्ध कराया। इसी सरकारी सूचना के आधार पर जिले के नौ विधायकों के विधायक निधि खर्च का यह रिपोर्ट कार्ड सामने आया है।

नौ विधायकों को मिली 213.75 करोड़ की निधि, खर्च हुए 145.86 करोड़

सरकारी विवरण के अनुसार उधमसिंह नगर जिले के वर्तमान नौ विधायकों को प्रति विधायक 23.75 करोड़ रुपये की दर से कुल 213.75 करोड़ रुपये की विधायक निधि आवंटित हुई। इसमें से जून 2026 तक 145.86 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

यानी जिले में कुल विधायक निधि का करीब 68 प्रतिशत हिस्सा खर्च हुआ, जबकि 67.89 करोड़ रुपये अभी खर्च होना बाकी है।

आंकड़े बताते हैं कि एक ओर कुछ विधायक अपनी निधि का 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा खर्च कर चुके हैं, वहीं दूसरी ओर बाजपुर में विधायक निधि का लगभग आधा हिस्सा अभी भी विकास कार्यों पर खर्च होने की प्रतीक्षा में है।

राणा ने मारी बाजी, 74 फीसदी निधि खर्च कर जिले में नंबर वन

विधायक निधि खर्च करने के मामले में नानकमत्ता विधायक गोपाल सिंह राणा ने जिले में पहला स्थान हासिल किया है। उन्होंने अपनी विधायक निधि का 74 प्रतिशत खर्च किया है।

राणा ने 555 विकास कार्यों के लिए 1837.19 लाख रुपये के प्रस्ताव मुख्य विकास अधिकारी को भेजे। इनमें से सभी 555 कार्यों के 1799.27 लाख रुपये के प्रस्ताव स्वीकृत हुए।

इन कार्यों के लिए 1741.08 लाख रुपये कार्यदायी संस्थाओं को अवमुक्त किए गए और यह पूरी धनराशि खर्च हो गई। इसके अलावा 13.28 लाख रुपये प्रशासनिक व्यय जोड़कर कुल 1754.36 लाख रुपये, यानी करीब 17.54 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

555 में से 542 काम पूरे, सिर्फ 13 कार्य प्रगति पर

गोपाल सिंह राणा द्वारा स्वीकृत 555 कार्यों में 377 सामान्य वर्ग, 22 अनुसूचित जाति और 156 जनजाति वर्ग के कार्य शामिल हैं।

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इनमें से 542 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 13 कार्य प्रगति पर बताए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक सामान्य वर्ग के 366, अनुसूचित जाति के 22 और जनजाति वर्ग के 154 कार्य पूरे हो चुके हैं।

सौरभ बहुगुणा दूसरे स्थान पर, 72 फीसदी निधि खर्च

विधायक निधि खर्च करने में सितारगंज विधायक सौरभ बहुगुणा दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने अपनी निधि का 72 प्रतिशत खर्च किया है।

बहुगुणा ने 512 विकास कार्यों के लिए 1824.57 लाख रुपये के प्रस्ताव भेजे। इनमें से 511 कार्यों के 1822.67 लाख रुपये के प्रस्ताव स्वीकृत हुए।

कार्यदायी संस्थाओं को 1695.07 लाख रुपये अवमुक्त किए गए, जो पूरी तरह खर्च हो गए। इसमें 13.28 लाख रुपये प्रशासनिक व्यय जोड़ने के बाद कुल खर्च 1708.35 लाख रुपये, यानी करीब 17.08 करोड़ रुपये रहा।

स्वीकृत कार्यों में 353 सामान्य वर्ग, 117 अनुसूचित जाति और 41 जनजाति वर्ग के कार्य बताए गए हैं। सूचना में पूर्ण कार्यों के आंकड़ों में वर्गवार संख्या का उल्लेख करते समय कुल संख्या के साथ विसंगति दिखाई देती है; सरकारी विवरण के अनुसार 27 कार्य प्रगति पर बताए गए हैं।

काशीपुर के त्रिलोक चीमा 71 फीसदी के साथ तीसरे नंबर पर

काशीपुर विधानसभा के विधायक त्रिलोक सिंह चीमा विधायक निधि खर्च करने में जिले में तीसरे स्थान पर हैं। उन्होंने अपनी निधि का 71 प्रतिशत खर्च किया है।

चीमा ने 141 विकास कार्यों के लिए 1804.49 लाख रुपये के प्रस्ताव मुख्य विकास अधिकारी को भेजे। इनमें सभी 141 कार्यों के 1804.48 लाख रुपये के प्रस्ताव स्वीकृत हुए।

कार्यदायी संस्थाओं को 1669.16 लाख रुपये अवमुक्त हुए और पूरी राशि खर्च हो गई। प्रशासनिक व्यय के 13.28 लाख रुपये जोड़ने के बाद कुल खर्च 1682.44 लाख रुपये, यानी करीब 16.82 करोड़ रुपये रहा।

स्वीकृत 141 कार्यों में 111 सामान्य वर्ग और 30 अनुसूचित जाति वर्ग के कार्य हैं। अनुसूचित जनजाति के लिए कोई कार्य दर्ज नहीं है।

इनमें 120 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 21 कार्य प्रगति पर हैं।

अरविंद पांडे 70 फीसदी खर्च के साथ चौथे स्थान पर

गदरपुर विधायक अरविंद पांडे ने विधायक निधि खर्च करने में 70 प्रतिशत का आंकड़ा हासिल किया है। वह जिले में चौथे स्थान पर हैं।

उन्होंने 351 विकास कार्यों के लिए 1837.54 लाख रुपये के प्रस्ताव भेजे। सभी 351 कार्यों के 1837.39 लाख रुपये के प्रस्ताव स्वीकृत हुए।

कार्यदायी संस्थाओं को 1655.26 लाख रुपये अवमुक्त किए गए और पूरी धनराशि खर्च हो गई। प्रशासनिक व्यय जोड़कर कुल खर्च 1668.54 लाख रुपये, यानी करीब 16.69 करोड़ रुपये रहा।

स्वीकृत कार्यों में 267 सामान्य वर्ग, 47 अनुसूचित जाति और 37 जनजाति वर्ग के कार्य शामिल हैं। इनमें 340 कार्य पूर्ण और 11 कार्य प्रगति पर हैं।

किच्छा के तिलकराज बेहड़ 69.12 फीसदी पर

किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ विधायक निधि खर्च करने में पांचवें स्थान पर हैं। उन्होंने 69.12 प्रतिशत निधि खर्च की है।

उन्होंने 451 विकास कार्यों के लिए 1831.67 लाख रुपये के प्रस्ताव भेजे, जिनमें से 438 कार्यों के 1786.32 लाख रुपये के प्रस्ताव स्वीकृत हुए।

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कार्यदायी संस्थाओं को 1628.44 लाख रुपये अवमुक्त हुए और पूरी राशि खर्च हुई। प्रशासनिक व्यय जोड़ने के बाद कुल खर्च 1641.72 लाख रुपये, यानी करीब 16.42 करोड़ रुपये रहा।

स्वीकृत 438 कार्यों में 322 सामान्य वर्ग और 116 अनुसूचित जाति वर्ग के कार्य हैं। जनजाति वर्ग का कोई कार्य दर्ज नहीं है।

इनमें 403 कार्य पूर्ण और 35 कार्य प्रगति पर हैं।

खटीमा के भुवन कापड़ी 68.12 फीसदी खर्च के साथ छठे नंबर पर

खटीमा विधायक भुवन चन्द्र कापड़ी ने अपनी विधायक निधि का 68.12 प्रतिशत खर्च किया है। वह जिले में छठे स्थान पर हैं।

उन्होंने 838 विकास कार्यों के लिए 1836.76 लाख रुपये के प्रस्ताव भेजे। इनमें से 814 कार्यों के 1805.52 लाख रुपये के प्रस्ताव स्वीकृत हुए।

कार्यदायी संस्थाओं को 1614.93 लाख रुपये अवमुक्त हुए और पूरी राशि खर्च हो गई। प्रशासनिक व्यय जोड़ने के बाद कुल खर्च 1628.21 लाख रुपये, यानी करीब 16.28 करोड़ रुपये रहा।

स्वीकृत कार्यों में 476 सामान्य वर्ग, 173 अनुसूचित जाति और 165 जनजाति वर्ग के कार्य शामिल हैं। सरकारी विवरण में 781 कार्य पूर्ण और 33 कार्य प्रगति पर बताए गए हैं।

जसपुर के आदेश चौहान 67.12 फीसदी पर, सातवां स्थान

जसपुर विधायक आदेश सिंह चौहान विधायक निधि खर्च करने में सातवें स्थान पर हैं। उनकी निधि का 67.12 प्रतिशत खर्च हुआ है।

उन्होंने 251 विकास कार्यों के लिए 1726.18 लाख रुपये के प्रस्ताव भेजे। इनमें से 250 कार्यों के 1726.18 लाख रुपये के प्रस्ताव स्वीकृत हुए।

कार्यदायी संस्थाओं को 1580.85 लाख रुपये अवमुक्त किए गए, जो पूरी तरह खर्च हुए। प्रशासनिक व्यय जोड़कर कुल खर्च 1594.13 लाख रुपये, यानी करीब 15.94 करोड़ रुपये रहा।

स्वीकृत कार्यों में 192 सामान्य वर्ग और 58 अनुसूचित जाति वर्ग के कार्य हैं। जनजाति वर्ग का कोई कार्य दर्ज नहीं है।

इनमें 228 कार्य पूर्ण और 22 कार्य प्रगति पर बताए गए हैं।

रुद्रपुर के शिव अरोड़ा 67 फीसदी पर, आठवां स्थान

रुद्रपुर विधायक शिव अरोड़ा की विधायक निधि का 67 प्रतिशत हिस्सा खर्च हुआ है। वह जिले में आठवें स्थान पर हैं।

अरोड़ा ने 454 विकास कार्यों के लिए 1796.55 लाख रुपये के प्रस्ताव भेजे। इनमें से 450 कार्यों के 1792.41 लाख रुपये के प्रस्ताव स्वीकृत हुए।

कार्यदायी संस्थाओं को 1579.03 लाख रुपये अवमुक्त हुए और पूरी राशि खर्च हो गई। प्रशासनिक व्यय जोड़ने के बाद कुल खर्च 1592.31 लाख रुपये, यानी करीब 15.92 करोड़ रुपये रहा।

स्वीकृत 450 कार्यों में 352 सामान्य वर्ग, 71 अनुसूचित जाति और 27 जनजाति वर्ग के कार्य शामिल हैं। इनमें 430 कार्य पूर्ण हो चुके हैं और 20 कार्य प्रगति पर हैं।

बाजपुर में सबसे धीमी रफ्तार, यशपाल आर्य सिर्फ 55 फीसदी पर

विधायक निधि खर्च करने के मामले में बाजपुर विधायक यशपाल आर्य जिले में सबसे निचले पायदान पर हैं। उनकी विधायक निधि का सिर्फ 55 प्रतिशत हिस्सा ही जून 2026 तक खर्च हुआ है।

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यशपाल आर्य ने 484 विकास कार्यों के लिए 1556.32 लाख रुपये के प्रस्ताव भेजे। इनमें से 480 कार्यों के 1536.32 लाख रुपये के प्रस्ताव स्वीकृत हुए।

कार्यदायी संस्थाओं को 1303.13 लाख रुपये अवमुक्त किए गए, जिसमें से 1303.11 लाख रुपये खर्च हुए। इसके अलावा 13.28 लाख रुपये प्रशासनिक व्यय जोड़कर कुल खर्च 1316.39 लाख रुपये, यानी करीब 13.16 करोड़ रुपये रहा।

स्वीकृत 480 कार्यों में 385 सामान्य वर्ग, 73 अनुसूचित जाति और 22 जनजाति वर्ग के कार्य हैं।

इनमें 429 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 51 कार्य अभी प्रगति पर हैं।

राणा और आर्य के बीच 19 फीसदी का बड़ा फासला

विधायक निधि खर्च करने के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में सबसे ऊपर रहने वाले गोपाल सिंह राणा और सबसे नीचे रहने वाले यशपाल आर्य के बीच करीब 19 प्रतिशत अंक का अंतर है।

राणा ने जहां 74 फीसदी निधि खर्च की है, वहीं आर्य की निधि खर्च का प्रतिशत 55 फीसदी है। यानी दोनों विधानसभा क्षेत्रों में विधायक निधि के इस्तेमाल की रफ्तार में खासा अंतर सामने आया है।

68 फीसदी निधि खर्च, 67.89 करोड़ अभी बाकी

कुल मिलाकर सरकारी आंकड़े जिले के विकास की तस्वीर का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने रखते हैं। नौ विधायकों को मिली 213.75 करोड़ रुपये की निधि में से 145.86 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि 67.89 करोड़ रुपये की राशि अभी खर्च होनी बाकी है।

अब बड़ा सवाल यह है कि शेष निधि का इस्तेमाल कब और कितनी तेजी से होता है। क्योंकि विधायक निधि का सीधा संबंध स्थानीय स्तर के विकास कार्यों से है और जनता की नजर इस बात पर रहती है कि उसके क्षेत्र के लिए स्वीकृत विकास कार्य सिर्फ कागजों में रहते हैं या वास्तव में जमीन पर भी दिखाई देते हैं।

रिपोर्ट कार्ड ने खोली विकास की तस्वीर

आरटीआई से सामने आए इन आंकड़ों ने उधमसिंह नगर की नौ विधानसभा सीटों में विधायक निधि खर्च की अलग-अलग तस्वीर सामने रख दी है। नानकमत्ता के गोपाल राणा 74 फीसदी के साथ टॉप पर हैं, सितारगंज के सौरभ बहुगुणा 72 फीसदी के साथ दूसरे और काशीपुर के त्रिलोक सिंह चीमा 71 फीसदी के साथ तीसरे स्थान पर हैं।

वहीं गदरपुर के अरविंद पांडे 70 फीसदी, किच्छा के तिलकराज बेहड़ 69.12 फीसदी, खटीमा के भुवन कापड़ी 68.12 फीसदी, जसपुर के आदेश चौहान 67.12 फीसदी, रुद्रपुर के शिव अरोड़ा 67 फीसदी और बाजपुर के यशपाल आर्य 55 फीसदी पर हैं।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि बाकी बची 67.89 करोड़ रुपये की विधायक निधि कब तक विकास कार्यों में खर्च होती है और अगली रिपोर्ट में इन आंकड़ों में कितना बदलाव आता है।

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