माँ की ममता के आगे हारा गुलदार: जबड़े में दबे 5 साल के मासूम को छुड़ा लाई माँ; जसपुर-ठाकुरद्वारा बॉर्डर पर दहशत
ठाकुरद्वारा/जसपुर (11 मार्च 2026): ठाकुरद्वारा रेंज के दलपतपुर गाँव में सोमवार रात एक दिल दहला देने वाली वारदात हुई। घात लगाकर बैठे एक गुलदार ने घर के बाहर खड़े 5 वर्षीय बच्चे पर हमला कर उसे अगवा करने की कोशिश की, लेकिन माँ के साहसी प्रतिकार के कारण मासूम की जान बच गई।
1. मोबाइल के लिए रो रहा था बच्चा, तभी हुआ हमला
घटना सोमवार शाम करीब 7:30 बजे की है। जसपुर-ठाकुरद्वारा मार्ग स्थित दलपतपुर निवासी रवि मजदूरी के लिए घर से निकल रहा था। उसका 5 वर्षीय पुत्र मोक्ष मोबाइल की जिद को लेकर खड़ंजे पर खड़ा होकर रोने लगा। इसी दौरान:
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घात लगाकर हमला: झाड़ियों में छिपे गुलदार ने अचानक मोक्ष पर झपट्टा मारा।
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जंगल की ओर कूच: गुलदार ने बच्चे को अपने जबड़े में दबाया और तेजी से जंगल की ओर भागने लगा।
2. माँ पिंकी का जांबाज मुकाबला
बच्चे की चीख और गुलदार की गुर्राहट सुनकर माँ पिंकी घर से बाहर निकली। सामने का दृश्य देख वह एक पल के लिए भी नहीं झिझकी और शोर मचाते हुए निहत्थी ही गुलदार के पीछे दौड़ पड़ी।
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दहशत में भागा गुलदार: एक महिला को पूरी ताकत से अपनी ओर आता देख और शोर सुनकर गुलदार सहम गया। उसने मोक्ष को रास्ते में ही छोड़ दिया और घने जंगल में ओझल हो गया।
3. अस्पताल में भर्ती, खतरे से बाहर
ग्रामीणों ने तुरंत घायल मोक्ष को उठाकर मुरादाबाद रोड स्थित एक निजी अस्पताल पहुँचाया।
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चोटें: चिकित्सकों के अनुसार, गुलदार के दांतों और पंजों से बच्चे के कान और गले पर गहरे घाव हुए हैं।
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स्वास्थ्य अपडेट: समय पर इलाज मिलने से मोक्ष की स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।
Snapshot: घटना का विवरण
| विवरण | जानकारी |
| पीड़ित बच्चा | मोक्ष (5 वर्ष), पुत्र रवि |
| साहसी माँ | पिंकी (दलपतपुर निवासी) |
| स्थान | दलपतपुर, ठाकुरद्वारा रेंज (यूपी-उत्तराखंड बॉर्डर) |
| वन विभाग की कार्रवाई | क्षेत्र में गश्त बढ़ाई गई, ग्रामीणों को चेतावनी जारी |
| प्रमुख मांग | गुलदार को पकड़ने के लिए तत्काल पिंजरा लगाया जाए |
वन विभाग का पक्ष
जसपुर वन प्रभाग के रेंजर महेश बिष्ट ने बताया कि मामला यूपी के ठाकुरद्वारा रेंज का है, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण जसपुर वन विभाग भी अलर्ट पर है। ठाकुरद्वारा के बीट ऑफिसर को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि वे शाम के समय अकेले जंगल की ओर न जाएं और बच्चों को घर के अंदर रखें।

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