गदेरे का पानी पीना और नहाना पड़ा भारी: अस्पताल में दो बुजुर्गों और 4 साल के बच्चे की नाक से निकाली गई जिंदा जोंक
पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोतों (गदेरे और धारे) का पानी पीना और उनमें नहाना आम जनजीवन का हिस्सा है, लेकिन पौड़ी जिले में तीन लोगों को ऐसा करना बेहद भारी पड़ गया। गदेरे के पानी के साथ दो बुजुर्गों और एक मासूम बच्चे की नाक के भीतर जिंदा जोंक (Leech) घुस गई। इसका पता पीड़ितों को तब चला जब उन्हें सांस लेने में गंभीर तकलीफ, नाक में लगातार खुजली और कुछ रेंगने का अहसास होने लगा। हालत बिगड़ने पर जब तीनों मरीज जिला अस्पताल पहुंचे, तो वहां तैनात नाक, कान व गला (ENT) विशेषज्ञ ने जटिल प्रक्रिया के बाद तीनों की नाक से सफलतापूर्वक जिंदा जोंक बाहर निकाली।
गदेरे में पानी पीते ही फेफड़ों तक पहुंचने वाली थी जोंक: सबदरखाल के बुजुर्ग की बची जान
जिला अस्पताल पौड़ी के ईएनटी एवं थायराइड विशेषज्ञ डॉ. अश्वनी चौहान ने बताया कि अस्पताल के ओपीडी (OPD) में लगातार ऐसे संवेदनशील मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने तीन अलग-अलग मामलों की विस्तृत जानकारी साझा की:
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पहला मामला: सबदरखाल क्षेत्र के एक 75 वर्षीय बुजुर्ग को पिछले कुछ दिनों से सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ महसूस हो रही थी। जब उनके नाक की एंडोस्कोपी व गहन जांच की गई, तो श्वसन नली के पास एक बड़ी जोंक चिपकी हुई पाई गई। बुजुर्ग ने बताया कि उन्होंने कुछ दिनों पहले रास्ते में आते समय एक गदेरे (बरसाती नाले) से सीधे मुंह लगाकर पानी पिया था, संभवतः उसी दौरान जोंक नाक के रास्ते भीतर चली गई।
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दूसरा मामला: डोभ-श्रीकोट निवासी एक 60 वर्षीय बुजुर्ग ने डॉक्टरों को बताया कि उन्हें अपनी नाक के भीतर किसी भारी वस्तु के होने का लगातार अहसास हो रहा था और असहनीय खुजली हो रही थी। जांच करने पर उनकी नाक से भी एक बड़ी जोंक बरामद हुई। इन बुजुर्ग ने भी गदेरे के प्राकृतिक स्रोत से पानी पिया था।
पैठाणी के 4 साल के मासूम की नाक में घुसी जोंक, नहाने के दौरान हुआ हादसा
तीसरा और सबसे संवेदनशील मामला पैठाणी क्षेत्र का है। यहां एक 4 साल के मासूम बच्चे को उसके परिजनों ने गर्मी से राहत दिलाने के लिए गांव के पास बहने वाले गदेरे में नहलाया था। नहाने के दौरान पानी के बहाव के साथ जोंक बच्चे की महीन नाक के रास्ते भीतर घुसकर चिपक गई। बच्चे को लगातार आ रही दिक्कतों के बाद जब परिजन उसे अस्पताल लाए, तो डॉक्टरों ने बेहद सावधानी बरतते हुए मासूम की नाक से जोंक को सुरक्षित बाहर निकाला। डॉक्टर ने बताया कि तीनों मरीजों को जोंक निकालने के बाद जरूरी चिकित्सकीय परामर्श और दवाइयां देकर घर भेज दिया गया है।
पहाड़ के धारे-गदेरे में पानी पीते समय बरतें सावधानी: डॉ. अश्वनी चौहान
मौसम में आ रहे बदलाव और गदेरों में जोंक के बढ़ते मामलों को लेकर ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अश्वनी चौहान ने पहाड़ी क्षेत्रों के नागरिकों और पर्यटकों के लिए एक जरूरी एडवायजरी व चेतावनी जारी की है:
“पहाड़ों में गदेरे, गधेरों और प्राकृतिक धारों से पानी पीना बेहद सामान्य गतिविधि है, लेकिन गर्मियों और बरसात के मौसम में इन स्रोतों में बेहद महीन जोंक मौजूद होती हैं, जो पानी पीते या नहाते समय बिना पता चले नाक या कान के रास्ते शरीर में दाखिल हो जाती हैं। इनसे बचने के लिए हमेशा पानी को छानकर या बोतल में भरकर ही पिएं, सीधे स्रोत में मुंह न लगाएं। इसके अलावा, छोटे बच्चों को असुरक्षित गदेरों में नहलाने से पूरी तरह बचें।”
डॉ. चौहान ने यह भी चिंता जताई कि वर्तमान में जिला अस्पताल में बच्चों के कान बहने और नाक से अचानक खून आने (नकसीर फूटने) के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है, जो कि पानी के जरिए इन्फेक्शन या जोंक के काटने का शुरुआती लक्षण हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
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