हल्द्वानी : पत्थरबाजी से पुलिस के दर्जनों अफसरों समेत 200 से अधिक जवान घायल, हिंसा की आशंका से बसें भी रद

हल्द्वानी में अतिक्रमण के खिलाफ ऐक्शन पर गुरुवार को जमकर बवाल हुआ है। मस्जिदऔर मदरसे को तोड़े जाने से नाराज लोगों ने कार्रवाई का जमकर विरोध किया। तीन घंटे में करीब 100 से अधिक दोपहिया और चौपहिया वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया।
चारों तरफ से हो रही पत्थरबाजी में करीब 300 पुलिसकर्मी, हल्द्वानी एसडीएम, तहसीलदार समेत कई लोग घायल हुए। देर रात तक बेस अस्पताल समेत कई निजी अस्पतालों में घायलों का इलाज कराया गया।वनभूलपुरा के मलिक के बगीचे की कार्रवाई का हर तरीके से विरोध करने के लिए सैकड़ों युवा, छोटे बच्चे और महिलाएं पहले से ही तैयार थीं।
हर गली में एकत्र भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गया। पुलिस और अफसरों की वापसी का रास्ता रोकने के लिए बाईकों में आग लगाकर रास्ते पर गिरा दी गईं। पुलिस की सिटी पेट्रोल कार और नगर निगम के एक ट्रैक्टर को भी आग के हवाले कर दिया गया। भारी विरोध और उपद्रव झेलने के बाद अतिक्रमण ध्वस्तीकरण की कार्रवाई बीच में रोककर अधिकारी और सभी पुलिसकर्मी वापस लौटने लगे।
लेकिन रास्तेभर में आग लगाकर गिराई गई बाईकों से आगे बढ़ने में काफी दिक्कत हुई। इसका फायदा उठाकर उपद्रवियों ने घरों की छतों से पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। लाइन नंबर एक से 17 तक जिस भी गली से पुलिसकर्मी, मीडियाकर्मी और अन्य लोग जान बचाकर भागे वहीं, उनको छतों से निशाना बनाया गया।
देर रात तक पुलिस और खूफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पत्थरबाजी से पुलिस के दर्जनों अफसरों समेत 200 से अधिक जवान घायल हुए। इसके अलावा एसडीएम हल्द्वानी पारितोष वर्मा, तहसीलदार सचिन कुमार समेत कई अफसरों के भी घायल होने की सूचना है।
हिंसा की आशंका से बसें भी रद
शहर में बवाल बढ़ने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के लिए हल्द्वानी के बस स्टेशन को खाली करवा दिया। गुरुवार रात आठ बजे बाद हल्द्वानी और काठगोदाम डिपो की सभी बसों को निरस्त कर दिया गया। देर रात बाहरी राज्यों से वापसी करने वाली बसों को शहर के बाहर ही ऐहतियात के तौर पर रोका गया। परिवहन निगम के सहायक महाप्रबंधक एसएस बिष्ट ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र से आने वाली बसों को शहर के बाहरी मार्गों से निकाला गया।
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