‘मैंने कलमा पढ़ा और बच गया’. पहलगाम हमले से दशहत में असम के प्रोफेसर, कहा- सामने मौत दिख रही थी

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पहलगाम में आतंकी हमले में बाल-बाल बचे असम के एक प्रोफेसर ने पूरी घटना को बयां किया है. कहा कि गनीमत थी कि उन्हें कलमा पढ़ने आता था और इसी वजह से उनकी जान भी बच गई. घटना के 24 घंटे बाद भी दहशत में जी रहे प्रोफेसर ने कहा कि उन्होंने मौत को अपने करीब से गुजरते देखा है.

ऐसी मौत जो अब भी दिमाग से निकलने का नाम नहीं ले रही. यह प्रोफेसर अपने पत्नी बच्चों के साथ छट्टियां मनाने के लिए गए थे.

असम यूनिवर्सिटी में बंगाली डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर देबाशीष भट्टाचार्य ने एक मीडिया हाउस में अपने खौफ को बयां किया है. उन्होंने कहा कि पहलगाम की बेसरन घाटी में वह अपने परिवार के साथ घूमने गए थे. अचानक वहां आतंकी पहुंच गए और लोगों का धर्म पूछ-पूछकर गोली मारने लगे. उस समय वह अपने पत्नी बच्चों के साथ एक पेड़ के नीचे लेटे थे. उन्होंने देखा कि आसपास में कई लोग आतंकियों के डर से कलमा पढ़ रहे हैं. उन्हें देखकर वह भी कलमा पढ़ने लगे.

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पास में लेटे व्यक्ति को मारी गोली

इतने में एक आतंकी उनकी ओर आया. उसने पूछा भी कि क्या कर रहे हो, लेकिन उन्होंने जवाब देने के बजाय और जोर जोर से कलमा पढ़ना शुरू कर दिया. यह देखकर आतंकी दूसरी ओर जाने लगा. जाते जाते उसने उनके बगल में लेटे व्यक्ति के सिर में गोली मार दी. उसके जाते ही वह पत्नी और बेटे को साथ लेकर चुपके से निकल गए. प्रोफेसर भट्टाचार्य के मुताबिक करीब दो घंटे तक पैदल चलने के बाद वह अपने होटल तक पहुंचे.हालांकि सामने मौत का नजारा देखने के बाद उन्हें अब भी विश्वास नहीं हो पा रहा कि वह जिंदा हैं.

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मंगलवार को पहलगाम में हुआ आतंकी हमला

बता दें कि मंगलवार की दोपहर कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने भीषण नरसंहार किया था. इसमें लोगों से धर्म पूछ-पूछकर उन्हें गोली मारी थी. इस वारदात में 26 लोग मारे गए थे. इस दौरान कई लोगों ने कलमा पढ़कर या फिर मुस्लिम होने की वजह से जिंदा भी बच गए थे. ऐसा ही दावा पुणे के एक कारोबारी की बेटी ने भी किया है. कहा कि वहां आतंकी लोगों से धर्म पूछते और फिर गोली मार दे रहे थे. कहा कि उसके पिता और चाचा को भी आतंकियों ने गोली मारी है. उसके पिता से आतंकियों ने कुरान की एक आयत सुनाने को कहा था, लेकिन वह नहीं सुना पाए थे.