भाजपा के किले पर चढ़ाई की तैयारी, मिशन-2027 के लिए कांग्रेस ने उतारी जंबो फौज

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नई प्रदेश कार्यकारिणी में 24 उपाध्यक्ष, 36 महासचिव और 107 सचिव; काशीपुर से संदीप सहगल और डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय को मिली जिम्मेदारी

राजू अनेजा,काशीपुर। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार उत्तराखंड कांग्रेस ने अपनी नई प्रदेश कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में तैयार की गई नई टीम में पदाधिकारियों की लंबी फौज उतारी गई है। कांग्रेस ने 24 उपाध्यक्ष, 36 महासचिव और 107 सचिव बनाकर संगठन को चुनावी मोड में डालने का संकेत दे दिया है। इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत 41 वरिष्ठ नेताओं को कार्यकारी समिति में जगह दी गई है।

गुरुवार देर रात कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने नई कार्यकारिणी की घोषणा की। गणेश गोदियाल के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से ही नई टीम का इंतजार चल रहा था। अब कार्यकारिणी के ऐलान के साथ कांग्रेस ने आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए संगठन को धार देने की कवायद शुरू कर दी है।

 

काशीपुर को भी मिली संगठन में अहम जगह

भाजपा के मजबूत राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले काशीपुर से कांग्रेस ने भी अपने संगठनात्मक समीकरण साधे हैं। संदीप सहगल और डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय को प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।

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काशीपुर से दो चेहरों को प्रदेश संगठन में जगह मिलने को स्थानीय कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की तैयारी में जुटी है।

 

एक साथ उतारी पदाधिकारियों की लंबी फौज

नई कार्यकारिणी में राजेंद्र भंडारी, नवीन जोशी, अभिषेक सिंह, विजय गुंसोला, तेलू राम, पुष्कर जैन, राकेश लाल शाह, दीप शर्मा, मकबूल कुरैशी, अमरजीत सिंह, याकूब सिद्दीकी, राजेंद्र शाह, जसवंत सिंह चौहान, सुमित्तर भुल्लर, अनीता शर्मा, जयेन्द्र रमोला, संजय किरोला, राजेंद्र टंगड़िया, गौरव चौधरी, डॉ. गणेश उपाध्याय, वीरेन्द्र पोखरियाल, नीरज त्यागी, राकेश सिंह राणा, इशिता, विनोद चौहान, राकेश राजपूत, राव शेर मोहम्मद, राकेश नेगी, अरविन्द प्रधान, शोभा बिष्ट, दीपा आर्या, अनिल भास्कर, अश्वनी बहुगुणा, नरेंद्र राणा, डॉ. सोनिया आनंद और संदीप चीमा समेत कई नेताओं को महासचिव बनाया गया है।

वहीं हेमेश खर्कवाल, विजय सरस्वत, सूर्यकांत धस्माना, धीरेंद्र प्रताप, राजकुमार, मनोज रावत, सतीश नैनवाल, लालचंद शर्मा, शहरयार खान, सीपी सिंह, संजय पालीवाल, राजेंद्र पाल सिंह, सुखविंदर कौर, राजीव महर्षि, अनुपम शर्मा, हेमंत बगड़वाल, मधु सांगुरी, डॉ. प्रेम बहुखंडी, दर्शन लाल, संजय जैन, संतोष चौहान, सुजाता पॉल, संजय सैनी और इंदु मान को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है।

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घोषणा पत्र से लेकर अनुशासन तक समितियां भी तैयार

कांग्रेस ने संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने के लिए विभिन्न समितियों का भी गठन किया है। घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष भुवन कापड़ी होंगे, जबकि डॉ. प्रेम बहुखंडी को संयोजक बनाया गया है। समिति में गुरदीप सिंह सप्पल, सूर्यकांत धस्माना और सुजाता पॉल को सदस्य बनाया गया है।

अनुशासन समिति की कमान विक्रम सिंह नेगी को सौंपी गई है। इसमें ललित फरस्वाण, अनुपम शर्मा, हेमा पुरोहित और सीपी सिंह सदस्य होंगे।

वहीं एसआईआर समिति के अध्यक्ष मनोज रावत बनाए गए हैं। अमरेंद्र बिष्ट और अधिवक्ता संदीप चमोली को सदस्य बनाया गया है। आरोप पत्र समिति की जिम्मेदारी करण माहरा को दी गई है, जबकि मनोज रावत, डॉ. प्रेम बहुखंडी और डॉ. प्रतिमा सिंह समिति के सदस्य होंगे।

 

सीमित टीम का वादा, लेकिन बन गई ‘जंबो टीम’

प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने संगठन की कमान संभालने के बाद कार्यकारिणी का आकार सीमित रखने की बात कही थी, लेकिन नई टीम सामने आने के बाद यह दावा फिलहाल धरातल पर उतरता नजर नहीं आया। 24 उपाध्यक्ष, 36 महासचिव और 107 सचिव समेत बड़ी संख्या में पदाधिकारियों की नियुक्ति ने कार्यकारिणी को ‘जंबो टीम’ का रूप दे दिया है।

राजनीतिक गलियारों में अब टीम के आकार को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि दिल्ली स्तर पर अंतिम दौर में सूची में कई बदलाव हुए, जिसके चलते कार्यकारिणी का आकार बढ़ता चला गया।

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अब सवाल—जंबो टीम भाजपा के किले में कितनी सेंध लगा पाएगी?

नई कार्यकारिणी के गठन के बाद कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस विशाल संगठन को जमीनी ताकत में बदलने की होगी। पदाधिकारियों की लंबी सूची से संगठन का विस्तार तो हुआ है, लेकिन असली परीक्षा बूथ स्तर पर होगी।

काशीपुर जैसे भाजपा के मजबूत गढ़ में कांग्रेस के सामने चुनौती और भी बड़ी है। ऐसे में संदीप सहगल और डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय को प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी मिलने के बाद स्थानीय संगठन के सामने नई टीम को चुनावी रणनीति में उतारने की चुनौती होगी।

अब देखना यह होगा कि कांग्रेस की यह ‘जंबो टीम’ सिर्फ पदों की लंबी सूची साबित होती है या भाजपा के मजबूत किले में सचमुच सेंध लगाने वाली चुनावी मशीनरी बनकर मैदान में उतरती है।

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