
मॉर्निंग वॉक करने वालों के गुजरते ही टूटी विशाल शाखा, कुछ सेकंड की दूरी ने बचा दी कई जिंदगियां • केडीएफ की लाइट लाइन क्षतिग्रस्त • वर्षों से कार्रवाई की मांग, फिर भी जिम्मेदार विभाग बने रहे मूकदर्शक
राजू अनेजा, काशीपुर।द्रोणासागर में मंगलवार की सुबह जो हुआ, वह किसी चेतावनी से कम नहीं था। वर्षों से खतरे की घंटी बजा रहा विशालकाय सूखा पेड़ आखिरकार भरभराकर टूट पड़ा। राहत सिर्फ इतनी रही कि कुछ ही सेकंड पहले मॉर्निंग वॉक कर रहे लोग वहां से आगे निकल चुके थे। यदि शाखा कुछ पल पहले गिरती, तो यह घटना कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म बन सकती थी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब खतरे की जानकारी पहले से थी, स्थानीय लोग लगातार शिकायतें कर रहे थे और ‘हिमालय प्रहरी’ ने भी इस पेड़ की जर्जर स्थिति को प्रमुखता से प्रकाशित कर प्रशासन को चेताया था, तब आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे थे?
बारिश बनी वरदान, नहीं तो सुबह मातम में बदल सकती थी
मंगलवार सुबह करीब साढ़े छह बजे द्रोणासागर पथ पर हल्की बारिश हो रही थी। मौसम खराब होने के कारण सामान्य दिनों की तुलना में मॉर्निंग वॉक करने वालों की संख्या कम थी। यही वजह रही कि एक संभावित बड़ा हादसा टल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चक्रेश जैन, डॉ. योगराज और प्रमोद पेड़ के नीचे से निकल चुके थे। उनके पीछे डॉ. आलोक, डॉ. सिरोही और खजाना सिंह आ रहे थे कि अचानक तेज धमाके के साथ पेड़ की विशाल शाखा सड़क पर आ गिरी। धमाके की आवाज सुनकर पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई।
“बस कुछ सेकंड और… शायद मैं बच नहीं पाता”
घटना के प्रत्यक्षदर्शी डॉ. आलोक ने बताया कि यदि वह कुछ कदम पीछे होते तो विशाल शाखा सीधे उनके ऊपर गिरती।
उन्होंने कहा, “बस कुछ सेकंड का ही अंतर था। अगर मैं वहीं होता तो शायद आज जिंदा नहीं बचता। भगवान की कृपा रही कि हम आगे निकल चुके थे।”
उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद अन्य मॉर्निंग वॉकर भी सिहर उठे। सभी ने माना कि मंगलवार की सुबह उन्हें नई जिंदगी मिली है।
केडीएफ की लाइट लाइन भी टूटी
पेड़ की भारी शाखा गिरने से काशीपुर डेवलपमेंट फोरम (केडीएफ) द्वारा लगाई गई लाइट लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई। सौभाग्य से उस समय वहां कोई राहगीर मौजूद नहीं था, अन्यथा बिजली के तार और भारी शाखा मिलकर हादसे को और भी गंभीर बना सकते थे।
‘खूनी पेड़’ की पहचान, फिर भी कार्रवाई नहीं
स्थानीय नागरिक बताते हैं कि यह पेड़ वर्षों से खतरे का पर्याय बना हुआ है। इसकी सूखी शाखाएं पहले भी कई बार टूटकर गिर चुकी हैं। इसी वजह से आसपास के लोग इसे ‘खूनी पेड़’ कहकर पुकारते हैं।
नागरिकों का आरोप है कि नगर निगम, संबंधित विभागों और प्रशासन को कई बार इसकी जानकारी दी गई। सामाजिक संगठनों ने भी लिखित और मौखिक रूप से ध्यान आकर्षित कराया, लेकिन हर बार कार्रवाई आश्वासनों तक ही सीमित रही।
‘हिमालय प्रहरी’ ने पहले ही दिखाई थी हकीकत
इस पेड़ की जर्जर स्थिति और संभावित खतरे को लेकर ‘हिमालय प्रहरी’ ने पहले ही प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर प्रशासन को सचेत किया था। खबर में स्पष्ट रूप से आशंका जताई गई थी कि यदि समय रहते वैज्ञानिक तरीके से छंटाई या अन्य आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
मंगलवार की घटना ने उस आशंका को सच साबित कर दिया। हालांकि इस बार कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह घटना संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर गई।
अब तकनीकी जांच और कार्रवाई की मांग
घटना के बाद काशीपुर डेवलपमेंट फोरम (केडीएफ) ने नगर निगम और जिला प्रशासन से तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराने की मांग की है। फोरम का कहना है कि द्रोणासागर परिसर में मौजूद सभी पुराने और जर्जर पेड़ों का विशेषज्ञों से सर्वे कराया जाए और जो पेड़ खतरा बन चुके हैं, उनकी वैज्ञानिक तरीके से प्रूनिंग अथवा आवश्यक कार्रवाई की जाए।
सवाल वही… क्या अब जागेगा सिस्टम?
मंगलवार की घटना सिर्फ एक हादसा टलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही पर बड़ा सवाल भी है। यदि कुछ सेकंड का अंतर न होता और कोई राहगीर इस शाखा की चपेट में आ जाता, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?
फिलहाल द्रोणासागर ने एक बार फिर सिस्टम को चेताया है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस चेतावनी को गंभीरता से लेते हैं या फिर किसी बड़े हादसे के बाद जागने की पुरानी परंपरा को ही आगे बढ़ाते हैं।
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

