
राजू अनेजा, रुद्रपुर । जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं इस कदर बीमार हो चुकी हैं कि अब स्वस्थ लोग भी कागजों में गंभीर बीमारी के मरीज बना दिए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही का ताजा मामला तब सामने आया, जब 200 पूरी तरह सामान्य मरीजों को सरकारी पोर्टल पर टीबी संक्रमित दर्ज कर दिया गया। जिन लोगों ने कभी खांसी तक की शिकायत नहीं की, वे एक झटके में संक्रामक रोगी घोषित हो गए।
यह चौंकाने वाली चूक सीएमओ कार्यालय में तैनात एक क्लर्क की लापरवाही से सामने आई, जिसने टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत डाटा फीडिंग के दौरान भारी गलती कर दी। जैसे ही यह जानकारी मरीजों तक पहुंची, वे स्तब्ध रह गए और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
वीसी में खुली पोल, आंकड़े बढ़ते ही मचा हड़कंप
मामला उस वक्त उजागर हुआ जब शासन स्तर पर चल रही वीडियो कॉन्फ्रेंस में जिले के टीबी मरीजों का आंकड़ा अचानक बढ़ा हुआ दिखा। शक होने पर रिकॉर्ड खंगाला गया तो पता चला कि टीबी पोर्टल पर करीब साढ़े चार लाख मरीजों की डिटेल अपलोड की गई थी। इसी दौरान डाटा एंट्री में गंभीर चूक हो गई और 200 सामान्य मरीज टीबी पॉजिटिव दर्शा दिए गए।
सबसे हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी संख्या में गलत एंट्री होने के बावजूद किसी भी स्तर पर सत्यापन नहीं किया गया, जिससे विभागीय लापरवाही पूरी तरह उजागर हो गई।
टीबी का ठप्पा लगते ही मरीजों में दहशत
टीबी जैसी बीमारी का नाम जुड़ते ही मरीजों और उनके परिजनों में डर और भ्रम की स्थिति बन गई। कई लोग सामाजिक संकोच के चलते घर से निकलना छोड़ बैठे। कुछ ने कामकाज बंद कर दिया, तो कई परिवार मानसिक तनाव में आ गए। यह मामला केवल तकनीकी गलती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों की सामाजिक और मानसिक जिंदगी पर सीधा प्रहार बन गया।
अब जांच के आदेश, लेकिन भरोसा कौन दिलाए?
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हरेंद्र मलिक ने बताया कि संबंधित मरीजों की ट्रूनेट जांच कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि सवाल यह है कि जिस विभाग की एक क्लिक की गलती से 200 लोग बीमार घोषित हो जाएं, उस पर आम जनता भरोसा कैसे करे?
यह घटना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली, मॉनिटरिंग सिस्टम और जवाबदेही पर बड़ा सवालिया निशान है। अगर समय रहते गलती सामने न आती, तो न जाने कितने और निर्दोष लोग सरकारी रिकॉर्ड में गंभीर बीमारी के मरीज बना दिए जाते।
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