इंस्पिरेशन स्कूल के प्रबंधक ने शिक्षा विभाग को घेरा: ‘NCERT किताबों के नाम पर हो रहा करोड़ों का खेल’; नोटिस को बताया आधारहीन, SC के स्टे का दिया हवाला

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हल्द्वानी के इंस्पिरेशन स्कूल के प्रबंधक दीपक बल्यूटिया ने शिक्षा विभाग द्वारा एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों के प्रकाशन और उनके दामों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। गुरुवार को आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली पर ‘करोड़ों के घपले’ की आशंका जताते हुए सरकार से जांच की मांग की है।

यहाँ उनके द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदुओं और शिक्षा विभाग के आरोपों पर उनकी सफाई का विवरण दिया गया है:

हल्द्वानी (10 अप्रैल 2026): किताबों के दाम और स्कूलों के नोटिस को लेकर चल रहे विवाद में अब स्कूल प्रबंधन ने भी मोर्चा खोल दिया है। दीपक बल्यूटिया ने प्रेस के सामने विभाग की नीतियों और कार्यप्रणाली को चुनौती दी है।

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1. अधिक दामों और घपले का आरोप

दीपक बल्यूटिया ने किताबों के प्रकाशन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा:

  • नियमों का उल्लंघन: एनसीईआरटी केवल सरकारी स्कूलों में मुफ्त वितरण और मान्यता प्राप्त स्कूलों के लिए 25% अतिरिक्त किताबें छपवाने की अनुमति देती है, ताकि बच्चों को सस्ती किताबें मिलें।

  • अभिभावकों को चूना: शिक्षा विभाग द्वारा छापी गई किताबें मूल एनसीईआरटी किताबों से काफी महंगी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यक्ति विशेष को आर्थिक फायदा पहुँचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है और इसमें करोड़ों का घपला हो सकता है।

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2. विभाग के नोटिस पर पलटवार

शिक्षा विभाग द्वारा 46 स्कूलों को जारी किए गए ‘कारण बताओ’ नोटिस पर उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी:

  • नोटिस आधारहीन: उन्होंने विभाग के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि स्कूल के खिलाफ किसी भी मिलीभगत का कोई प्रमाण नहीं है।

  • पारदर्शिता का दावा: उनका कहना है कि सत्र शुरू होने से पहले ही स्कूल की वेबसाइट पर फीस संरचना (Fee Structure) और किताबों की सूची अपलोड कर दी गई थी।

3. सुप्रीम कोर्ट के स्टे का हवाला

उन्होंने एक महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु उठाते हुए कहा कि स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की किताबें ही अनिवार्य करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगाया हुआ है:

  • कोर्ट की अवमानना: यदि विभाग स्कूलों पर केवल इन्हीं पुस्तकों से पढ़ाने का दबाव डालता है, तो यह कोर्ट की अवमानना है।

  • समग्र विकास: स्कूल प्रबंधन बच्चों के विकास और अभिभावकों की जेब, दोनों का ध्यान रखते हुए ही पाठ्यक्रम चुनता है।

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