अल्मोड़ा का रहस्यमयी ‘स्याही देवी’ मंदिर: दिन में तीन बार रंग बदलती है मूर्ति; गुड़ और बेल के लेप से टिकी है 1700 साल पुरानी नींव

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अल्मोड़ा (13 मार्च 2026): अल्मोड़ा के शीतलाखेत के पास ऊंची पर्वत चोटियों पर स्थित स्याही देवी मंदिर न केवल 52 गाँवों की इष्टदेवी का निवास है, बल्कि प्राचीन स्थापत्य कला का एक बेजोड़ नमूना भी है। कत्यूरी राजवंश के समय निर्मित यह मंदिर अपने भीतर कई ऐसे रहस्य समेटे हुए है, जो आज के आधुनिक युग में भी लोगों को हैरत में डाल देते हैं।

1. मूर्ति का रहस्य: समय के साथ बदलता स्वरूप

मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ स्थापित माता की दिव्य प्रतिमा है। स्थानीय निवासियों और भक्तों का दावा है कि:

  • त्रिकाल रंग परिवर्तन: माता की मूर्ति का रंग दिन में तीन बार— सुबह, दोपहर और शाम को अलग-अलग आभा (Shade) में दिखाई देता है।

  • दिव्य उपस्थिति: श्रद्धालु इसे माता की जीवंत उपस्थिति का प्रमाण मानते हैं और इसी चमत्कार को देखने के लिए नवरात्रि में यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है।

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2. स्थापत्य कला: सीमेंट नहीं, ‘गुड़ और बेल’ का चमत्कार

इस मंदिर का निर्माण 900 से 1700 साल पहले हुआ माना जाता है, लेकिन इसकी मजबूती आज भी बरकरार है:

  • पारंपरिक तकनीक: मंदिर की ईंटों को जोड़ने के लिए किसी सीमेंट या चूने का नहीं, बल्कि गुड़ और बेल (Stone Apple) के विशेष औषधीय मिश्रण का उपयोग किया गया है।

  • एक रात का चमत्कार: लोककथाओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण रातों-रात हुआ था। कहा जाता है कि भारी बारिश के बावजूद अगली सुबह ईंटें खुद-ब-खुद पक चुकी थीं और मंदिर बनकर तैयार था।

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3. 52 गाँवों की इष्टदेवी और चैत्र नवरात्रि

स्याही देवी को कुमाऊं क्षेत्र के लगभग 52 गाँवों की कुलदेवी और इष्टदेवी के रूप में पूजा जाता है।

  • आगामी पर्व: 19 मार्च से शुरू हो रही चैत्र नवरात्रि के लिए मंदिर समिति ने विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं।

  • आस्था का केंद्र: मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। नवरात्रि के नौ दिनों तक यहाँ अखंड ज्योति और विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।

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Snapshot: स्याही देवी मंदिर एक नज़र में

विवरण जानकारी
स्थान शीतलाखेत के समीप, अल्मोड़ा (उत्तराखंड)
निर्माण काल कत्यूरी शासन काल (लगभग 900-1700 वर्ष पुराना)
विशेषता मूर्ति का दिन में तीन बार रंग बदलना
निर्माण सामग्री ईंटें, गुड़ और बेल का मिश्रण
प्रमुख अवसर चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि (19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि प्रारंभ)

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