चौराहों पर त्रिशूल-डमरू, स्कूलों में मौत का झूलता पंखा! क्या बच्चों की सुरक्षा से बड़ा है सौंदर्यीकरण?

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रुद्रपुर के अटल उत्कृष्ट विद्यालय में पढ़ाई के दौरान चलता पंखा टूटकर छात्रों पर गिरा, एक के सिर में लगे टांके, दूसरा घायल

 

करोड़ों के विकास दावों के बीच सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल

राजू अनेजा, रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)।
सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर बच्चों की जान पर भारी पड़ गई। शनिवार को शहर के एएनझा इंटर कॉलेज (अटल उत्कृष्ट आदर्श विद्यालय) में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कक्षा नौ में पढ़ाई के दौरान छत पर लगा चलता हुआ पंखा अचानक टूटकर नीचे गिर गया। पंखे की चपेट में आने से छात्र संगम गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि उसके पास बैठा वैष्णव भी चोटिल हो गया। घटना के बाद पूरी कक्षा सहम गई और स्कूल में हड़कंप मच गया।

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पढ़ाई के बीच अचानक गूंजी चीखें

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शिक्षक कक्षा में पढ़ा रहे थे और सभी छात्र पढ़ाई में व्यस्त थे। तभी तेज आवाज के साथ पंखा नीचे आ गिरा। हादसे में प्रीत विहार कॉलोनी निवासी छात्र संगम के सिर में गहरी चोट लगी और खून बहने लगा। उसके बगल में बैठा छात्र वैष्णव भी घायल हो गया। यदि पंखा कुछ इंच इधर-उधर गिरता तो कई बच्चों की जान खतरे में पड़ सकती थी। घायल छात्रों को शिक्षक एम.एम. जोशी तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां संगम के सिर पर टांके लगाए गए।

 

जर्जर रॉड बनी हादसे की वजह!

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पंखे को थामने वाली लोहे की रॉड काफी समय से कमजोर हो चुकी थी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि विद्यालय में नियमित सुरक्षा जांच आखिर क्यों नहीं हुई? यदि समय रहते पंखों और बिजली फिटिंग का निरीक्षण किया गया होता तो यह हादसा टाला जा सकता था।

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प्रधानाचार्य बोले— जांच के बाद होगी कार्रवाई

विद्यालय के प्रधानाचार्य राजपति बिंद ने बताया कि कक्षा नौ का सेक्शन डी नए भवन में संचालित हो रहा है। पंखा किस कारण गिरा, इसकी जांच कराई जा रही है। यह देखा जा रहा है कि लोहे की रॉड कमजोर थी या किसी बोल्ट के निकलने से हादसा हुआ। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

करोड़ों चौराहों पर, लेकिन स्कूल भगवान भरोसे

एक तरफ शहर के चौराहों पर त्रिशूल, डमरू और अन्य प्रतीकों के जरिए सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। दूसरी ओर सरकारी स्कूलों में बच्चों के सिर के ऊपर लगे पंखे तक सुरक्षित नहीं हैं। सवाल यह है कि जब स्कूलों की मूलभूत सुविधाएं ही सुरक्षित नहीं हैं तो विकास के दावे किस काम के हैं? शिक्षा के मंदिरों की सुरक्षा आखिर प्राथमिकता क्यों नहीं बन रही?

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सबसे बड़ा सवाल

जब सरकार शहर को सुंदर बनाने में व्यस्त है, तब सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? कहीं अगली बार ऐसा हादसा किसी मासूम की जान न ले ले—क्या तब व्यवस्था जागेगी?

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