उत्तराखंड: पुराना वोटर होने पर भी नाम नहीं तो प्रोजनी के रूप में कराएं मैपिंग

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उत्तराखंड में इन दिनों मतदाता सूची के प्री-एसआइआर (विशेष गहन पुनरीक्षण से पूर्व) की प्रक्रिया चल रही है। यदि आप वर्ष 2003 से पुराने वोटर हैं, लेकिन इस बार आपका नाम मतदाता सूची में नहीं मिल रहा है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसे मतदाता संतान (प्रोजनी) के रूप में अपनी मैपिंग करा सकते हैं।


🔍 प्रोजनी मैपिंग क्या है?

  • उद्देश्य: यदि किसी मतदाता का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं है, लेकिन वह दावा करता है कि वह राज्य गठन से पहले से लगातार मतदान करता आ रहा है।

  • प्रक्रिया: ऐसे मामलों में, मतदाता के माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम मतदाता सूची में देखा जाएगा।

  • फायदा: प्रोजनी के रूप में मैपिंग कराने से मतदाता को अपनी पहचान के अतिरिक्त दस्तावेज नहीं देने पड़ेंगे, और उसका नाम मतदाता सूची में आसानी से दर्ज हो सकेगा।

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📊 प्री-एसआइआर की वर्तमान स्थिति

  • प्री-एसआइआर के तहत वर्तमान में 40 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं का वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान किया जा रहा है।

  • एसआइआर (SIR) शुरू होने पर सभी मतदाताओं को एक-एक गणना फार्म दिया जाएगा, जिसमें वे अपनी मौजूदा सूची के हिसाब से जानकारी देने के साथ-साथ प्रोजनी के रूप में माता-पिता या दादा-दादी के नाम का भी जिक्र कर सकेंगे।

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सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तूदास ने स्पष्ट किया कि प्री-एसआइआर का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक मतदाता सूची की बीएलओ ऐप से मैपिंग करना है, और जिन लोगों का नाम किसी कारणवश इस सूची में नहीं है, वे प्रोजनी वोटर के रूप में अपनी मैपिंग करा सकते हैं।

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