उत्तराखंड : यहां नमक और चावल के स्वाद के कारण अब तक 30 बंद घरों के ताले तोड़ चुके है भालू

खबर शेयर करें -

मुनस्यारी : उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में गांव में रहने वाले लोगों के लिए एक हैरान करने वाली खबर है। चोरों के बाद अब लोगों को अपने घरों को जंगल के इस चोर से बचाना भी मुश्किल हो गया है। जी हां चौंकिए मत, भालू अब बंद घरों के ताले तोड़ रहे हैं।

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले भालू सामान्य तौर पर जड़ी-बूटी खाते हैं, लेकिन बीते एक अरसे से इन्हें नमक और चावल का स्वाद बेहद भा गया है। इसके लिए भालू बंद घरों के ताले तक तोड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक भालुओं के व्यवहार में ये बदलाव हाल के कुछ वर्षों में आया है।

यह भी पढ़ें 👉  विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट पर अभद्र टिप्पणी से भाजपा कार्यकर्ताओं में आक्रोश, कार्रवाई न होने पर दी धरने की चेतावनी

हिमालय से सटे माइग्रेशन गांव मिलम, टोला, बिल्ज्यू, बुर्फू, मर्तोली, मापा, गनघर, लास्पा, ल्वा, रालम आदि में इन दिनों भालुओं ने आतंक मचाया हुआ है। दरअसल ठंड शुरू होने के बाद इन गांवों में रहने वाले लोग घाटियों की तरफ लौट जाते हैं। ग्रामीण अगली बार प्रवास पर आने के लिए वहां कुछ अनाज सुरक्षित छोड़कर आते हैं। लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही भालू अनाज साफ कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें 👉  बिंदुखत्ता की जनता के साथ यह दोहरा चरित्र कैसा? बिंदुखत्ता राजस्व गांव कब सरकार जवाब दें- मोहन कुड़ाई

इस साल अब तक 30 घरों के ताले तोड़ चुके

अब तक भालू करीब 30 घरों के ताले तोड़ चुके हैं। बीते वर्ष एक भालू के सिर पर खाद्य सामाग्री रखा कनस्तर भी फंस गया था। इसका वीडियो वायरल हुआ था। लोग अक्तूबर में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही निचले इलाकों का रूख करने लगते हैं। इसके बाद मार्च तक गांव पूरी तरह वीरान रहते हैं। अप्रैल-मई में फिर लोग यहां खेती करने पहुंचते हैं। करीब छह माह की खेती से उनकी आजीविका चलती है।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी: मुखानी कोतवाली से बेटे को न छोड़ने पर नाराज महिला की जहर खाने से मौत, इलाके में तनाव

हिमालयी गांवों में भालुओं ने घरों के ताले तोड़ दिए हैं। इसकी शिकायत मिली है। वन विभाग की टीम को मौक पर जाकर निरीक्षण करने को कहा है।
यशवीर सिंह, एसडीएम मुनस्यारी

Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad