हल्द्वानी में अतिक्रमण पर कार्रवाई: 100 से अधिक घरों पर लाल निशान, स्थानीय लोगों का विरोध प्रदर्शन

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हल्द्वानी, नैनीताल: हल्द्वानी शहर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए प्रशासन ने कई घरों पर लाल निशान लगाए हैं, जिसके खिलाफ अब स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। शहर के राजपुरा क्षेत्र में 100 से ज़्यादा घरों में लाल निशान लगाए गए हैं। इसके विरोध में स्थानीय पार्षद प्रीति आर्य और कांग्रेस नेता हेमंत साहू के नेतृत्व में लोगों ने एसडीएम कार्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया।


 

‘हिटलर शाही’ और आंदोलन की चेतावनी

 

प्रदर्शनकारी कांग्रेस नेता हेमंत साहू ने प्रशासन पर “हिटलर शाही” का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन लोगों के घरों को तोड़ने के लिए चिह्नीकरण का काम कर रहा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि यहाँ रहने वाले लोग सालों से बिजली, पानी और हाउस टैक्स का बिल चुका रहे हैं, लेकिन अब उन्हें अतिक्रमण के नाम पर डराया जा रहा है, जो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि वे साल 1930 से यहाँ रह रहे हैं और अब प्रशासन नहर और नाला चौड़ीकरण के नाम पर गरीब लोगों को कुचलने का प्रयास कर रहा है। पार्षद प्रीति आर्य ने चेतावनी दी है कि अगर जिला प्रशासन अतिक्रमण के नाम पर घरों को तोड़ने की कोशिश करता है, तो एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी ज़िम्मेदारी प्रशासन की होगी।


 

मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, लोगों में दहशत

 

प्रदर्शनकारियों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक ज्ञापन भी भेजा है, जिसमें उन्होंने इस मामले का संज्ञान लेने और लोगों को राहत प्रदान करने की अपील की है। लोगों का कहना है कि जब से उनके घरों में लाल निशान लगाए गए हैं, तब से वे दहशत में हैं और उन्हें अपना आशियाना उजड़ने का डर सता रहा है।

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सिटी मजिस्ट्रेट का बयान

 

इस संबंध में सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल सिंह चौहान ने बताया कि:

  • फिलहाल अभी केवल नोटिस देने और आपत्तियों के निस्तारण का काम चल रहा है।
  • अभी किसी प्रकार का कोई ध्वस्तीकरण नहीं होगा।
  • पहले सर्वे किया जाएगा, फिर नोटिस देने के बाद उनका निस्तारण होगा, और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।

सिटी मजिस्ट्रेट ने यह भी बताया कि शहर से निकलने वाली देवखड़ी नाला पर बहुत से लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है, जिसके कारण बरसात में नहर का पानी ओवरफ्लो होकर शहर में फैल जाता है। इसे देखते हुए नहर चौड़ीकरण का कार्य होना है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता के अनुसार अतिक्रमण को तोड़ा जाएगा और कुछ जगहों पर वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जाएगा।

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क्या आपको लगता है कि इस तरह के अतिक्रमण हटाने की कार्रवाइयों में विस्थापित होने वाले लोगों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए?