देहरादून: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें 107 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई हैं। इस वैश्विक संकट का सीधा असर अब उत्तराखंड के बुनियादी ढांचे पर दिखने लगा है। सड़कों के निर्माण में प्रयुक्त होने वाले तारकोल (बिटुमेन) के दामों में पिछले कुछ महीनों में 60 फीसदी तक का भारी उछाल आया है, जिसके चलते प्रदेश में कई सड़क परियोजनाएं अधर में लटक गई हैं और ठेकेदारों ने पुराने रेट पर काम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
वित्त विभाग को भेजा गया रेट रिवाइज करने का प्रस्ताव
तारकोल की आसमान छूती कीमतों के कारण लोक निर्माण विभाग (PWD) के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। विभाग ने बढ़ी हुई लागत को देखते हुए दरों को संशोधित (रेट रिवाइज) करने का एक प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा है। पीडब्ल्यूडी सचिव पंकज कुमार पांडेय के अनुसार, मार्च के बाद से बिटुमेन की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। भारत सरकार ने नेशनल हाईवे के कार्यों के लिए और कई अन्य राज्यों ने भी नए रेट्स को मंजूरी दे दी है, इसी तर्ज पर अब उत्तराखंड में भी वित्त विभाग की सहमति का इंतजार है ताकि निर्माण कार्यों में तेजी लाई जा सके।
मानसून से पहले गड्ढा मुक्त अभियान पर मंडराया खतरा
राज्य में वर्तमान में करीब 4,000 किलोमीटर सड़कों पर काम चल रहा है। सरकार ने 15 मई तक सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बिटुमेन की बढ़ी कीमतों और बेमौसम बारिश ने इस अभियान की गति धीमी कर दी है। सचिव पांडेय ने स्पष्ट किया कि बिटुमेन सड़क की ऊपरी परत (ब्लैक टॉप) के लिए अनिवार्य है। यदि समय रहते दरों पर फैसला नहीं हुआ, तो मानसून से पहले सड़कों की मरम्मत और निर्माण कार्य ठप हो सकते हैं, जिससे आगामी यात्रा सीजन और आम जनता की आवाजाही पर बुरा असर पड़ सकता है।
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