अल्मोड़ा में शिक्षकों ने शिक्षक दिवस को ‘विरोध दिवस’ के रूप में मनाया, सरकार के खिलाफ निकाला मौन जुलूस

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अल्मोड़ा: उत्तराखंड के राजकीय शिक्षक संघ ने इस साल शिक्षक दिवस (5 सितंबर) को विरोध दिवस के रूप में मनाया। अपनी तीन-सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ी संख्या में शिक्षकों ने अल्मोड़ा के मुख्य बाजार में मौन जुलूस निकाला। उन्होंने सरकार पर हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।


 

क्या हैं शिक्षकों की प्रमुख मांगें?

 

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राजकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष भूपाल सिंह चिलवाल ने बताया कि उनका आंदोलन प्रांतीय नेतृत्व के निर्देश पर चलाया जा रहा है। उनकी तीन प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  1. शत-प्रतिशत पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू करना।
  2. प्रधानाचार्य के पदों पर सीधी भर्ती का विरोध करना।
  3. शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू करना।

 

सरकार पर लगाया हठधर्मिता का आरोप

 

जिलाध्यक्ष भूपाल सिंह ने आरोप लगाया कि 18 अगस्त से लगातार आंदोलन के बावजूद सरकार ने अभी तक शिक्षक संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी को बातचीत के लिए नहीं बुलाया है। उन्होंने कहा कि सरकार की हठधर्मिता के कारण शिक्षकों की न्यायसंगत मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे भविष्य में और भी उग्र प्रदर्शन कर सकते हैं।

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जिला मंत्री राजू मेहरा ने कहा कि शिक्षक दिवस का असली सम्मान तभी होगा, जब सरकार उनकी मांगों को पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षक, छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो इसका ध्यान रखते हुए शिक्षण कार्य भी कर रहे हैं।

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