उत्तराखंड भाजपा में अब ‘लो-रिस्क’ राजनीति का दौर: बार-बार मुख्यमंत्री बदलने के सिलसिले पर लगेगा ब्रेक; पुष्कर सिंह धामी ही होंगे आगामी चुनाव का चेहरा

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देहरादून: उत्तराखंड भाजपा के भीतर आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर चल रही राजनैतिक हलचलों के बीच एक बड़ी तस्वीर साफ होने लगी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का आगामी उत्तराखंड प्रवास केवल चुनावी तैयारियों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहने वाला है। राजनैतिक विश्लेषकों और पार्टी सूत्रों का मानना है कि अपने इस अहम दौरे के दौरान नितिन नवीन वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ही अगला विधानसभा चुनाव लड़ने के फैसले पर अंतिम सांगठनिक मुहर भी लगाएंगे। भाजपा का यह कदम साफ संकेत देता है कि हाईकमान अब राज्य को एक स्थिर नेतृत्व और स्थिर सरकार का संदेश देने की रणनीति पर काम कर रहा है।

नेतृत्व परिवर्तन की राजनीति से तौबा; स्थिरता का संदेश देना चाहती है भाजपा

पुष्कर सिंह धामी को ही आगामी चुनाव में भाजपा का मुख्य चेहरा बनाए रखने के पीछे केंद्रीय नेतृत्व के पास कई ठोस और रणनीतिक वजहें हैं:

  1. अस्थिरता के दौर का खात्मा: भाजपा अब उत्तराखंड में बार-बार मुख्यमंत्री बदलने की अपनी पुरानी छवि और राजनीति से पूरी तरह बाहर निकलना चाहती है। पूर्व के वर्षों में राज्य में कई नेतृत्व परिवर्तनों के कारण संगठन से लेकर सरकार के कामकाज तक में अस्थिरता पैदा हुई थी। पार्टी अब उस दौर को पीछे छोड़ एक मजबूत और टिकाऊ सरकार का भरोसा जनता को देना चाहती है।

  2. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और कड़े फैसले: भाजपा का मानना है कि उत्तराखंड जैसे राज्य में केवल विकास की बातें काफी नहीं हैं; यहाँ सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रवाद भी चुनावी माहौल को तय करते हैं। सीएम धामी ने समान नागरिक संहिता (UCC), सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, देश का सबसे कड़ा नकल विरोधी कानून और कड़े भू-कानून जैसे बड़े फैसले लेकर भाजपा के कोर (पारंपरिक) समर्थकों के बीच वैचारिक रूप से अपनी एक बेहद मजबूत पहचान स्थापित की है।

संघ-संगठन से बेहतर तालमेल और गुटीय विवादों से दूरी

संगठनात्मक स्तर पर भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस समय भाजपा के लिए सबसे सहज और निर्विवाद विकल्प बनकर उभरे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और पार्टी संगठन के साथ उनका तालमेल बेहद शानदार माना जाता है। धामी की सबसे बड़ी राजनैतिक ताकत यह रही है कि उन्होंने खुद को बड़े गुटीय विवादों और अंदरूनी खेमेबाजी से पूरी तरह दूर रखा है, जिसके कारण पार्टी के भीतर उनके नाम पर कोई बड़ा विरोध सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं देता है।

इसके अलावा, उत्तराखंड में युवा मतदाताओं की एक बहुत बड़ी संख्या है। भाजपा की राष्ट्रीय नीति भी राज्यों में नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे बढ़ाने की है, और इस पैमाने पर युवा व आक्रामक राजनीति करने वाले धामी पूरी तरह मुफीद बैठते हैं। वे इंटरनेट मीडिया (सोशल मीडिया) और आधुनिक जनसंपर्क के तौर-तरीकों में भी काफी माहिर माने जाते हैं।

क्यों मुफीद है धामी की ‘लो-रिस्क’ और सुरक्षित राजनीति?

भाजपा नेतृत्व के लिए पुष्कर सिंह धामी का चेहरा सबसे सुरक्षित मेल माना जा रहा है। इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं:

  • लो-रिस्क व्यक्तिगत राजनीति: धामी वैचारिक स्तर पर जितने आक्रामक और स्पष्ट हैं, व्यक्तिगत राजनीति के स्तर पर वे उतने ही सरल हैं और किसी प्रकार का टकराव पैदा नहीं करते। लंबे समय तक गुटबाजी से जूझने वाली उत्तराखंड भाजपा के लिए वे एक ऐसे चेहरे हैं जो संगठन को आसानी से साधकर रख सकते हैं।

  • चुनावी उपयोगिता: केंद्रीय नेतृत्व को साफ लगता है कि सांगठनिक संतुलन, वैचारिक स्पष्टता और चुनावी उपयोगिता—इन तीनों पैमानों का सबसे मुफीद और ‘सेफ’ कॉम्बिनेशन फिलहाल पुष्कर सिंह धामी ही हैं।

हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने यह साफ संकेत दिए थे कि अगले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ही पार्टी का चेहरा होंगे, जिसपर अब उनके उत्तराखंड दौरे के दौरान औपचारिक रूप से सांगठनिक मुहर लगना तय माना जा रहा है।