बेहड़ के मास्टरस्ट्रोक से तराई की राजनीति में मची हलचल, ठुकराल की एंट्री के बाद अब 9 सीटों पर नजर , भाजपा की बढ़ी बेचैनी

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राजू अनेजा, रुद्रपुर /काशीपुर।उधम सिंह नगर की सियासत इन दिनों अचानक गर्मा गई है। भाजपा छोड़कर आए राजकुमार ठुकराल की कांग्रेस में एंट्री ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के पीछे जो चेहरा सबसे ज्यादा चर्चा में है, वह है किच्छा के विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री तिलकराज बेहड़, जिन्हें अब तराई का ‘किंगमेकर’ कहा जा रहा है।

 

एंट्री में अड़चन, बेहड़ बने ‘गेम चेंजर’

कांग्रेस ज्वाइन करने के दौरान ठुकराल के सामने सबसे बड़ी बाधा बनीं पूर्व पालिका अध्यक्ष मीना शर्मा। ठुकराल ने माफी भी मांगी, लेकिन मीना शर्मा अपने रुख पर अडिग रहीं। ऐसे में सियासत के माहिर खिलाड़ी बेहड़ ने मोर्चा संभाला।
प्रदेश से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक तालमेल बैठाकर उन्होंने न सिर्फ ठुकराल की कांग्रेस में एंट्री करवाई, बल्कि पार्टी के भीतर उठ रहे विरोध को भी साध लिया।

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एक्शन में तराई का शेर’

तराई की राजनीति में बेहड़ का दबदबा किसी से छिपा नहीं है। भाजपा से टिकट कटने के बाद कांग्रेस का दामन थामकर उन्होंने जबरदस्त जीत हासिल की थी और कैबिनेट मंत्री बने।
हालांकि रुद्रपुर कांड के बाद उन्हें दो बार हार का सामना करना पड़ा, लेकिन वापसी करते हुए उन्होंने फिर साबित किया कि तराई में उनकी पकड़ आज भी मजबूत है और किच्छा से दमदार जीत हासिल कर तराई  की राजनीति में वापसी की।

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इस बार पूरी 9 सीट तक का लक्ष्य

पिछले विधानसभा चुनाव में उधम सिंह नगर की 9 सीटों में से 5 सीट कांग्रेस के खाते में लाने में बेहड़ की रणनीति अहम रही। अब उन्होंने साफ लक्ष्य तय कर दिया है—इस बार 9 की 9 सीट।
ठुकराल की एंट्री को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे काशीपुर और आसपास की सीटों पर कांग्रेस की स्थिति मजबूत हो सकती है।

भाजपा की बढ़ी टेंशन

बेहड़ की ‘चाणक्य नीति’ और लगातार हो रही राजनीतिक जोड़तोड़ ने भाजपा खेमे में हलचल बढ़ा दी है। खासकर ठुकराल जैसे प्रभावशाली चेहरे का कांग्रेस में जाना आने वाले चुनाव में बड़ा फैक्टर साबित हो सकता है।

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सियासी संकेत साफ

तराई की जमीन पर कांग्रेस अब आक्रामक मोड में है और बेहड़ इसके ‘रणनीतिकार’ बनकर उभरे हैं।
अगर उनका दांव सफल रहा, तो उधम सिंह नगर की राजनीति में बड़ा उलटफेर तय माना जा रहा है।

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