
राजू अनेजा | काशीपुर तराई की शांत फिजाओं में अब मतांतरण का मुद्दा बड़ा सामाजिक और प्रशासनिक सवाल बनकर उभर रहा है। “मिनी पंजाब” के नाम से पहचाने जाने वाले रुद्रपुर काशीपुर-बाजपुर क्षेत्र में कथित तौर पर पंजाब के अमृतसर से संचालित मतांतरण नेटवर्क की आहट ने प्रशासनिक गलियारों से लेकर गांवों तक हलचल तेज कर दी है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित जांच कमेटी की पड़ताल में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच के दौरान बाजपुर और काशीपुर के कुछ गांवों में बाहरी लोगों की लगातार आवाजाही, धार्मिक गतिविधियों और गरीब तबकों को कथित तौर पर प्रलोभन दिए जाने जैसी बातें सामने आई हैं। अब प्रशासन इन गतिविधियों की तह तक पहुंचने के लिए गांव-गांव जाकर जांच की तैयारी कर रहा है।
राय सिख और गरीब तबका बना निशाना!
तराई क्षेत्र का पंजाब से वर्षों पुराना सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव रहा है। इसी कनेक्शन का फायदा उठाकर कथित तौर पर ईसाई मिशनरियां गांवों में अपनी पैठ बढ़ा रही हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार राय सिख समाज और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता, इलाज, शिक्षा और आर्थिक सहयोग का लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित करने की कोशिशें की जा रही हैं।
प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि पहले यह मामला नानकमत्ता और आसपास के गांवों तक सीमित दिखाई दे रहा था, लेकिन अब इसकी कड़ियां गदरपुर, बाजपुर होते हुए काशीपुर तक पहुंचती नजर आ रही हैं।
काशीपुर के गांवों में बढ़ी निगरानी
जांच कमेटी के सामने काशीपुर क्षेत्र के हिम्मतपुर, खड़ाकपुरा और केशवपुरम जैसे इलाकों के नाम भी सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि इन क्षेत्रों में पंजाब से आने वाले लोगों की गतिविधियों पर स्थानीय स्तर पर पहले भी चर्चा होती रही है। अब प्रशासन ने इन गांवों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक जांच टीम जल्द ही संबंधित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से सीधे बातचीत करेगी और यह पता लगाएगी कि कहीं धार्मिक स्वतंत्रता की आड़ में दबाव या प्रलोभन देकर मतांतरण तो नहीं कराया जा रहा।
“धर्म परिवर्तन न करने पर धमकाने” के आरोप
मामले ने उस वक्त और गंभीर रूप ले लिया जब कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि धर्म परिवर्तन न करने पर उन्हें डराया-धमकाया गया। हालांकि प्रशासन अभी इन आरोपों की पुष्टि में जुटा है, लेकिन लगातार बढ़ती शिकायतों ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है।
वनवासी कल्याण आश्रम ने सौंपे साक्ष्य
बुधवार को वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़े पदाधिकारियों और प्रभावित परिवारों ने एडीएम वित्त एवं राजस्व कौस्तुभ मिश्रा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान कथित मतांतरण गतिविधियों से जुड़े कुछ दस्तावेज और साक्ष्य भी जांच टीम को दिए गए।
करीब आधे घंटे चली वार्ता में एडीएम ने स्पष्ट कहा कि उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2018 के तहत यदि किसी को प्रलोभन, दबाव या भय दिखाकर मतांतरण कराने के प्रमाण मिले तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का सख्त संदेश
एडीएम कौस्तुभ मिश्रा ने कहा कि जांच लगातार जारी है और कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ रही हैं। प्रशासन किसी भी हालत में कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं करेगा।
तराई में तेजी से फैल रहे इस मुद्दे ने अब सामाजिक संगठनों, प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है, जिससे कई और गांव प्रशासन की रडार पर आ सकते हैं।
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