बाल विवाह की शिकार 14 वर्षीय किशोरी बनी माँ; कथित पति पर पॉक्सो एक्ट के तहत FIR दर्ज
पिथौरागढ़ के मुनस्यारी से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई है, जहाँ बाल विवाह और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के उल्लंघन का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। महज 14 वर्ष की एक किशोरी ने महिला अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया है। प्रशासन ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
यहाँ इस मामले का पूरा विवरण दिया गया है:
पिथौरागढ़ (14 अप्रैल 2026): सीमांत तहसील मुनस्यारी के एक गांव से जुड़ा यह मामला तब सामने आया जब प्रसव पीड़ा के बाद किशोरी को अस्पताल लाया गया। दस्तावेजों की जांच में किशोरी की उम्र देखकर चिकित्सा प्रशासन दंग रह गया।
1. अस्पताल में हुआ खुलासे का घटनाक्रम
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अस्पताल में भर्ती: शनिवार (11 अप्रैल) की शाम को किशोरी को प्रसव के लिए पिथौरागढ़ महिला अस्पताल लाया गया था।
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उम्र का खुलासा: भर्ती प्रक्रिया के दौरान जब कागजों की जांच की गई, तो पता चला कि गर्भवती की उम्र केवल 14 वर्ष है।
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चिकित्सीय स्थिति: अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में किशोरी के 8 माह की गर्भवती होने की पुष्टि हुई। कम उम्र के कारण रिस्क को देखते हुए उसे डॉक्टरों की विशेष निगरानी में रखा गया।
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बेटे का जन्म: सोमवार (13 अप्रैल) की शाम करीब 5 बजे किशोरी ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।
2. प्रशासन की कार्रवाई और निगरानी
मामले की गंभीरता को देखते हुए बाल संरक्षण समिति और पुलिस सक्रिय हो गई है:
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पॉक्सो एक्ट में मुकदमा: मुनस्यारी थाने में किशोरी के कथित पति के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है।
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समिति का दौरा: बाल संरक्षण समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह खाती ने अस्पताल पहुँचकर जच्चा-बच्चा का हाल जाना। उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है।
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डॉक्टरों का बयान: जिला अस्पताल की पीएमएस डॉ. भागीरथी गर्ज्याल ने बताया कि फिलहाल माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं, लेकिन कम उम्र के कारण उन्हें अभी ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।
3. पहाड़ों में बाल विवाह की गंभीर चुनौती
यह घटना उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में छिपे तौर पर हो रहे बाल विवाह की कड़वी सच्चाई को उजागर करती है।
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जोखिम: कम उम्र में गर्भावस्था न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह किशोरी के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत घातक साबित हो सकती है।
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हालिया घटनाएं: हाल के दिनों में रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ के अन्य क्षेत्रों में भी बाल विवाह के कई मामले रोके गए हैं, जो समाज में जागरूकता की भारी कमी को दर्शाते हैं।
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