एक कप चाय ने तोड़ा डॉक्‍टर बनने का सपना! छात्रा ने हाई कोर्ट में लगाई न्याय की गुहार, जानें मामला

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ऐसा कहा जाता है कि भारत में चाय को लाने वाले अंग्रेज थे. 15 अगस्‍त 1947 को भारत से अंग्रेज तो चले गई लेकिन उनके द्वारा लाई गई चाय का जायका लोगों की जुबां से जुदा नहीं हो सका.

भारत में शायद ही कोई घर होकर जिसमें रोजाना चाय ना बनती हो. राजस्‍थान की राजधानी जयपुर के पास एक छोट से कस्‍बे बस्‍सी में एक एक छात्र का डॉक्‍टर बनने का सपना इसी चाय के प्‍याले के चलते अधर में लटकता हुआ नजर आ रहा है. अब इस पीड़ित छात्रा ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर मदद की गुहार लगाई है.

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बस्‍सी की रहने वाली 18 साल की दिशा ने 10वीं और 12वीं दोनों ही कक्षाओं में 100 प्रतिशत अंक प्राप्‍त किए थे. इस होनहार छात्र ने डॉक्‍टर बनने का सपना देखा था. लिहाजा बीते दो साल से इसके लिए तैयारी भी वो कर रही थी. एग्‍जाम के दौरान वो एक हादसे का शिकार हो गई. दरअसल, पेपर के लिए क्‍लासरूम में आए इनविजिलेटर की गलती का दिशा शिकार हो गई. इनविजिलेटर परीक्षा के दौरान चाय की चुस्‍की का आनन्‍द ले रहे थे.

ओएमआर शीट पर गिर गई थी चाय

दिशा ने अपनी याचिका में कहा है कि इनविजिलेटर की चाय उनकी ओएमआर शीट पर गिर गई थी, चाय फैलने के चलते कई प्रश्‍नों के उत्‍तर मिट गए थे. छात्रा का कहना है कि उसे नीट एग्‍जाम में 470 अंक मिले हैं. जिसके चलते वो एमबीबीएस की सीट से चूक गई हैं. उन्‍हें वेटनरी, बीडीएस, बीएससी और नर्सिंग मिल रही है. छात्रा ने हाई कोर्ट में कहा है कि इसके बावजूद भी इनविजिलेटर ने उन्‍हें अतिरिक्‍त पांच मिनट तक नहीं दिए. इन सबके बीच उसके 17 सवाल छूट गए जो उन्‍हें आते थे. अगर वो इनका जवाब देती तो निश्चित तौर पर उन्‍हें रिजल्‍ट में फायदा होता.

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हाई कोर्ट की सख्‍त कार्रवाई

हाई कोर्ट ने दिशा की शिकायत पर एग्‍जाम का संचालन करने वाली संस्‍था एनटीए से उनकी ओरिजनल ओएमआर शीट सहित पूरा रिकॉर्ड पेश करने के लिए कहा है. साथ ही परीक्षा केंद्र वाले स्‍कूल प्रिंसिपल को कमरे में लगे सीसीटीवी फुटेज के साथ चार जुलाई को अगली तारीख पर पेश होने का आदेश दिया गया है.