वाजपेयी के समय भी नीतीश के पास थे 12 सांसद, जानें कौन-कौन मंत्रालय मिले थे

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2024 में नीतीश कुमार पुराने रंग में लौटते दिख रहे हैं. इस चुनाव में उनकी पार्टी को 12 सीटें मिली हैं और वह बिहार में भाजपा के बराबर की ताकत बनकर उभरे हैं. इससे पहले 2019 में उनकी पार्टी के पास 16 सांसद थे बावजूद इसके उनकी पार्टी को केंद्र की मोदी सरकार में कोई खास महत्व नहीं मिला.

मनचाहा प्रतिनिधित्व नहीं मिलने की वजह से वह मोदी सरकार में शामिल नहीं हुए. उस समय के मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि नीतीश कुमार दो कैबिनेट मंत्रालय चाहते थे लेकिन पीएम मोदी की सरकार एक से ज्यादा देने को तैयार नहीं थी.

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अब 2019 बीते पांच साल हो गए हैं. वो समय कुछ और था और अब का समय कुछ और है. नीतीश कुमार 16 की जगह 12 सांसदों की बदौलता पहले से ज्यादा ताकतवर हो चुके हैं क्योंकि भाजपा को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला है. भाजपा को एक स्थायी सरकार के लिए नीतीश और चंद्रबाबू नायडू के समर्थन की जरूरत है.

1998 का फॉर्मूला
नीतीश इस बात को भलीभांती समझते हैं. यही कारण है कि वह मोदी के सामने 1998 का फॉर्मूला पेश कर सकते हैं. उस समय जदयू की जगह समता पार्टी हुआ करती थी. उसके नेता जॉर्ज फर्नांडीस थे. केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी थी. देश में गठबंधन की राजनीति का यह एक सफल प्रयोग था. हालांकि वाजपेयी की 1998 की सरकार केवल एक वोट से 13 महीने के कार्यकाल के बाद गिर गई. फिर 1999 के लोकसभा चुनाव में समता पार्टी और मजबूत हो गई और उसके 21 सांसद लोकसभा पहुंचे थे.

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1998 वाली सरकार में समता पार्टी को काफी महत्व मिला था. समता पार्टी के पास केवल 12 सांसद थे और उसको वाजपेयी सरकार में दो बड़े मंत्रालय मिले थे. जॉर्ज फर्नांडीस को रक्षा मंत्री बनाया गया था. साथ ही वह एनडीए के संयोजक भी थे. नीतीश कुमार को रेल मंत्री बनाया गया था. रेल मंत्रालय नीतीश कुमार का पसंदीदा मंत्रालय है.

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2024 में स्थिति नीतीश कुमार के अनुकूल है. उन्होंने एक तरह से केंद्र की राजनीति में वापसी की है. ऐसे में इस बार भी उनकी तरफ से इन दोनों मंत्रालयों की मांग पर जोर दिया जा सकता है.

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