हल्द्वानी में हाईकोर्ट शिफ्टिंग की कवायद तेज: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 3 संभावित स्थलों का तकनीकी परीक्षण शुरू, बेलबाबा सबसे मजबूत दावेदार
हल्द्वानी। नैनीताल हाई कोर्ट को हल्द्वानी स्थानांतरित करने की प्रक्रिया अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर हल्द्वानी में भूमि उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए जाने के बाद जिला प्रशासन ने संभावित स्थलों का नए सिरे से मूल्यांकन शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है और उसके अनुरूप संभावित भूमि का तकनीकी व तुलनात्मक प्रस्ताव तैयार कर जल्द ही शासन को भेजा जाएगा, जिसके बाद अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा। इस ऐतिहासिक आदेश के बाद हल्द्वानी में जमीनों को लेकर हलचल तेज हो गई है और निवेशकों की नजरें सरकार के अंतिम फैसले पर टिक गई हैं।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, हाई कोर्ट की स्थापना के लिए फिलहाल तीन प्रमुख स्थलों— गौलापार, बेलबाबा और चौसला का तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा है, जिनमें से प्रत्येक के अपने फायदे और चुनौतियां हैं:
1. गौलापार: पहली पसंद लेकिन चुनौतियां बड़ी
गौलापार में वर्ष 2024 में लगभग 26 हेक्टेयर वन भूमि चिह्नित की गई थी और यह क्षेत्र पिछले दो साल से ‘फ्रीज जोन’ घोषित है। यहाँ हाई कोर्ट बनने से पूरे क्षेत्र का तेजी से विकास होगा और न्यायिक संस्थानों, होटलों व व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। हालाँकि, यहाँ करीब 4,238 पेड़ों के कटान की आवश्यकता है और केंद्रीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति पहले ही वन भूमि हस्तांतरण के इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर चुकी है। इसके अलावा, गौला नदी के कटाव का दीर्घकालीन खतरा और हल्द्वानी शहर पर बढ़ने वाला ट्रैफिक का भारी दबाव इसकी मुख्य चुनौतियां हैं।
2. रामपुर रोड स्थित बेलबाबा: सबसे मजबूत दावेदार
वर्तमान परिस्थितियों में बेलबाबा को सबसे मजबूत विकल्प माना जा रहा है। यहाँ लगभग 125 हेक्टेयर का विशाल भूभाग उपलब्ध है, जहाँ व्यावसायिक प्लांटेशन के कारण पहले ही बड़े पैमाने पर पेड़ों का कटान हो चुका है, जिससे वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान होगी। यह स्थल पंतनगर एयरपोर्ट, एनएच-109 और रुद्रपुर-हल्द्वानी कॉरिडोर से सीधे जुड़ा हुआ है। शहर से बाहर होने के कारण यहाँ ट्रैफिक जाम की समस्या नहीं होगी और भविष्य में विस्तार के लिए पर्याप्त जगह मिलेगी। साथ ही, नजदीकी रुद्रपुर और ऊधमसिंह नगर क्षेत्र में लोगों को रहने के लिए सस्ते विकल्प मिल सकेंगे।
3. चौसला: राजस्व भूमि का विकल्प पर भाखड़ा नदी बड़ी बाधा
चौसला क्षेत्र में लगभग 10.79 हेक्टेयर राजस्व भूमि उपलब्ध है। राजस्व भूमि होने के कारण इसके हस्तांतरण की प्रारंभिक प्रक्रिया बेहद सरल है और आसपास अतिरिक्त वन भूमि मिलने की भी संभावना है। लेकिन तकनीकी रूप से यहाँ सबसे बड़ी बाधा क्षेत्र के बीच से गुजरने वाला बरसाती नाला और भाखड़ा नदी से जुड़ा जल निकास है। जल निकासी और सुरक्षा संबंधी इंजीनियरिंग समाधानों पर यहाँ अतिरिक्त भारी खर्च आ सकता है।
प्रॉपर्टी बाजार में आया भूचाल
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद हल्द्वानी के प्रॉपर्टी बाजार में एकाएक भारी उछाल आ गया है। खासकर गौलापार और रामपुर रोड क्षेत्र में जमीनों को लेकर निवेशकों की सक्रियता बढ़ गई है। प्रॉपर्टी कारोबारियों के अनुसार, कई प्रमुख स्थानों पर जमीनों के भाव रातों-रात 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में निवेशक सरकार के अंतिम फैसले के इंतजार में फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं, जिससे खरीद-फरोख्त की रफ्तार फिलहाल थोड़ी धीमी भी देखी जा रही है।
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