नैनीताल जिले के 45 स्कूलों को नोटिस: फीस वृद्धि और कॉपी-किताबों की मनमानी पर CEO सख्त; 20 अप्रैल तक मांगा जवाब
नैनीताल जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और नियमों के उल्लंघन पर शिक्षा विभाग ने बड़ा हंटर चलाया है। मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) जी.आर. जायसवाल ने जिले के 45 निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 20 अप्रैल तक जवाब तलब किया है।
यहाँ इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई का पूरा विवरण और प्रभावित स्कूलों की सूची दी गई है:
हल्द्वानी (17 अप्रैल 2026): अभिभावकों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया है। जांच में पाया गया कि कई स्कूल न केवल फीस बढ़ा रहे हैं, बल्कि अभिभावकों को विशिष्ट दुकानों से ही सामान खरीदने के लिए मजबूर भी कर रहे हैं।
1. नोटिस जारी करने के मुख्य कारण
प्रशासनिक जांच में स्कूलों द्वारा निम्नलिखित नियमों का उल्लंघन पाया गया:
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अवैध शुल्क वृद्धि: सरकारी निर्देशों के विरुद्ध ट्यूशन फीस और अन्य शुल्कों में बढ़ोतरी।
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मोनोपॉली (एकाधिकार): किताबों और यूनिफॉर्म के लिए विशेष दुकानें तय करना और अभिभावकों को वहीं भेजने का दबाव बनाना।
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वेबसाइट अपडेट न होना: सीबीएसई (CBSE) की गाइडलाइन के अनुसार स्कूल की वेबसाइट पर अनिवार्य जानकारी अपडेट न करना।
2. ब्लॉकवार स्कूलों की संख्या
| ब्लॉक | स्कूलों की संख्या |
| रामनगर | 20 |
| हल्द्वानी | 18 |
| भीमताल | 06 |
| रामगढ़ | 01 |
| कुल | 45 |
3. प्रमुख स्कूलों की सूची (जिन्हें नोटिस मिला)
हल्द्वानी ब्लॉक (18 स्कूल):
निर्मला कान्वेंट, क्वींस स्कूल, लक्ष्य इंटरनेशनल, हाइलेंडर पब्लिक स्कूल, बीएलएम एकेडमी, विद्या पुष्प एकेडमी, जेम्स पब्लिक स्कूल, गुरु द्रोण पब्लिक स्कूल, सृजन स्कूल, स्कालर हेवन स्कूल, मीना एकेडमी और अन्य।
रामनगर ब्लॉक (20 स्कूल):
सेंट जोसफ, डीएसबी पब्लिक स्कूल, जय मोहन, गुड लक, ग्रीन फील्ड एकेडमी, ओक बर्ड, गार्डन वैली, शेमराक प्री स्कूल, सन राईज, श्री गुरु नानक पब्लिक स्कूल और अन्य।
भीमताल व रामगढ़ ब्लॉक (7 स्कूल):
महर्षि विद्या मंदिर, मल्लिकार्जुन स्कूल, वुड ब्रिज स्कूल, डीविटो स्कूल, एनएल साह प्रोपट्री लर्निंग स्कूल, आयुष्मान कान्वेंट स्कूल।
4. आगे की कार्रवाई
CEO जी.आर. जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि:
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सभी संबंधित स्कूलों को 20 अप्रैल 2026 तक अपना स्पष्टीकरण देना होगा।
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जिन स्कूलों ने पहले नोटिस मिलने के बाद जवाब दे दिए हैं, उनकी समीक्षा की जा रही है।
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संतोषजनक जवाब न मिलने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ भारी जुर्माना या मान्यता रद्द करने जैसी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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