बागेश्वर जिला अस्पताल में गर्भवती महिला की मौत पर बवाल: पोस्टमार्टम में देरी से भड़के ग्रामीणों का चक्का जाम; अस्पताल के बाहर धरना

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बागेश्वर: जनपद के कपकोट क्षेत्र के तिरवाण गांव से एक बेहद दुखद और आक्रोशित करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ की निवासी व 27 वर्षीय गर्भवती आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तनुजा देवी की जिला अस्पताल में उपचार के दौरान दर्दनाक मृत्यु हो गई। महिला की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा पोस्टमार्टम में की गई कथित लापरवाही और 18 घंटे से अधिक की देरी से मृतका के परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उग्र ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जिला अस्पताल के इमरजेंसी गेट के बाहर धरना देते हुए मुख्य सड़क पर चक्का जाम कर दिया, जिससे हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। ग्रामीणों का आरोप था कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन ने उनकी सुध नहीं ली, जिसके चलते उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।

गर्भ नली में भ्रूण फंसने से बिगड़ी थी तबीयत, मासूम बेटे को छोड़ गई मृतका

पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, तिरवाण गांव निवासी मोहन चंद्र की पत्नी तनुजा देवी दो से तीन माह की गर्भवती थीं। बुधवार को अचानक उनकी तबीयत बेहद खराब हो गई।

  • गंभीर स्थिति की वजह: प्रारंभिक चिकित्सकीय जानकारी के मुताबिक, गर्भ नली (फैलोपियन ट्यूब) में भ्रूण फंस जाने (एक्टोपिक प्रेग्नेंसी) के कारण उन्हें असहनीय पेट दर्द उठा था। परिजनों ने बताया कि पूर्व में महिला की कोई गर्भ संबंधी जांच या अल्ट्रासाउंड नहीं कराया गया था, जिससे अंदरूनी स्थिति बेहद गंभीर और जानलेवा हो गई थी।

  • रेफरल के बाद मौत: बुधवार को हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कपकोट ले गए, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन जिला अस्पताल में इलाज के दौरान तनुजा देवी ने दम तोड़ दिया। मृतका अपने पीछे एक मासूम बेटे और रोते-बिलखते परिवार को छोड़ गई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

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18 घंटे बाद भी नहीं हुआ पोस्टमार्टम, प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

तनुजा देवी की मृत्यु के बाद जिला अस्पताल और स्थानीय प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पूरी तरह कटघरे में आ गई है। परिजनों का आरोप है कि बुधवार शाम करीब 6:00 बजे महिला की मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन गुरुवार दोपहर तक शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। शव को मोर्चरी में रखकर परिजन भटकते रहे। ग्रामीणों ने बताया कि वे इस मामले को लेकर दो बार जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के पास भी पहुंचे, लेकिन वहां से भी कोई संतोषजनक उत्तर या त्वरित कार्रवाई देखने को नहीं मिली। इसी उपेक्षा से तंग आकर सैकड़ों ग्रामीण और महिलाएं सड़क पर उतर आए।

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इमरजेंसी गेट के बाहर धरना, कोतवाली पुलिस और तहसील प्रशासन ने संभाला मोर्चा

पोस्टमार्टम में हो रही अत्यधिक देरी के खिलाफ आक्रोशित ग्रामीणों और विभिन्न संगठनों के जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल के मुख्य इमरजेंसी गेट के बाहर दरी बिछाकर धरना शुरू कर दिया। सड़क जाम होने की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस और तहसील प्रशासन की संयुक्त टीम दलबल के साथ मौके पर पहुंची।

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कोतवाल अनिल उपाध्याय और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. तपन शर्मा ने प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचकर उनसे वार्ता की और आवश्यक विधिक व कागजी कार्रवाई को तुरंत पूरा करवाया। अस्पताल प्रशासन और पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक और सटीक कारणों की विधिक पुष्टि हो सकेगी। प्रदर्शन के दौरान लक्ष्मी धर्मशक्तू, बसंती बघरी, आशु आर्या, सभासद गणेश तिरुवा, तनुज तिरुवा, दीपा देवी, गंगा आर्या सहित भारी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं मौजूद रहीं, जिन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।