उत्तराखंड में पर्यटकों पर लगेगा ‘यूजर चार्ज’: कचरा प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार की नई नीति

खबर शेयर करें -

पहाड़ों में बढ़ते प्लास्टिक और कचरे के संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने नए नियम अधिसूचित किए हैं। अब पर्यटकों से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन शुल्क (User Charge) वसूला जाएगा, जिससे स्थानीय नगर निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।

🗑️ नए नियमों की मुख्य विशेषताएं

  1. पर्यटक नियंत्रण: नगर निकायों को यह अधिकार होगा कि वे अपनी कूड़ा निस्तारण क्षमता के आधार पर पर्यटकों की संख्या को नियंत्रित कर सकें।

  2. संग्रहण केंद्र: पर्वतीय क्षेत्रों में गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे (जैसे प्लास्टिक, कांच) के लिए विशेष कलेक्शन सेंटर बनेंगे ताकि गंदगी जलस्रोतों तक न पहुंचे।

  3. होटल-रेस्तरां की जिम्मेदारी: सभी होटलों और रेस्तरां को अपने गीले कचरे (Wet Waste) का प्रसंस्करण (Processing) स्वयं करना अनिवार्य होगा।

  4. सख्त जुर्माना: खुले में कूड़ा फेंकने या नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड में 2027 चुनाव से पहले बीजेपी का बड़ा फेरबदल: विवादों के बीच दुष्यंत गौतम की छुट्टी, राम माधव बने नए प्रदेश प्रभारी

📉 उत्तराखंड में कचरे की गंभीर स्थिति

राज्य में कचरा प्रबंधन वर्तमान में एक बड़ी चुनौती बना हुआ है:

  • दैनिक उत्पादन: उत्तराखंड में हर दिन लगभग 2132 टन ठोस कचरा पैदा होता है।

  • लेगेसी वेस्ट (पुराना कचरा): राज्य में 61 डंप साइटों पर 23.5 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा है।

  • निस्तारण की गति: अभी तक केवल 45% पुराने कचरे का ही निपटान हो पाया है, शेष 55% अभी भी पहाड़ों और लैंडफिल साइटों पर संकट बना हुआ है।

यह भी पढ़ें 👉  लालकुआं में विकास कार्यों की समीक्षा: विधायक डॉ. बिष्ट ने दिए कड़े निर्देश, नहर कवरिंग व गौला कटान के काम जनवरी तक पूरे करने का अल्टीमेटम

🏭 थोक अपशिष्ट उत्पादकों (Bulk Waste Generators) पर शिकंजा

राज्य में लगभग 3000 से अधिक थोक अपशिष्ट उत्पादकों (जैसे बड़े आवासीय परिसर, मॉल, औद्योगिक इकाइयां) की पहचान की गई है।

  • स्वयं का प्लांट: नए नियमों के तहत इन्हें अपने परिसर के कचरे का संग्रहण, पृथक्करण (Segregation) और प्रसंस्करण स्वयं करना होगा।

  • निकायों को राहत: इससे नगर निगमों और नगर पालिकाओं पर कचरे का बोझ कम होगा।


📋 प्रमुख बिंदुओं का तुलनात्मक चार्ट

क्षेत्र पुरानी व्यवस्था नई व्यवस्था (1 अप्रैल, 2026 से)
पर्यटक कोई प्रत्यक्ष शुल्क नहीं यूजर चार्ज देना अनिवार्य होगा।
नगर निकाय सीमित संसाधन और आय यूजर चार्ज से आय बढ़ेगी; पर्यटकों की संख्या पर नियंत्रण का अधिकार।
थोक उत्पादक कचरा निकायों को सौंपना स्वयं प्रसंस्करण (Processing) की जिम्मेदारी।
पहाड़ी क्षेत्र डंपिंग साइट्स पर निर्भरता गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे के लिए विशेष केंद्र।
यह भी पढ़ें 👉  देहरादून से बाहर चंपावत में पहली बार आयोजित होगी धामी कैबिनेट की बैठक, 4 अक्टूबर को एनएचपीसी बनबसा में मंथन

Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad